अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ईरान युद्ध के बीच टैरिफ (Trump Tariff) लगाने का एलान कर दिया है। यह शुल्क ईरान के खिलाफ नहीं बल्कि अपनी “मोस्ट फेवर्ड नेशन” मूल्य निर्धारण पहल में शामिल नहीं होने वाली दवा कंपनियों को टारगेट करते हुए लगाया है। दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने एक व्यापक टैरिफ योजना की शुरुआत की है, साथ ही मेटल इंपोर्ट ड्यूटी (Import Duty on Metal) में भी नए बदलाव किए हैं। नई पॉलिसी के तहत कुछ आयातित पेटेंट दवाओं और उनके प्रमुख घटकों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया है। ट्रंप के इस कदम का मकसद दवा निर्माताओं को अमेरिका में प्रोडक्शन ट्रांसफर करने और अमेरिकी उपभोक्ताओं को सीधे कम कीमतों पर दवाएं उपलब्ध कराने के लिए मजबूर करना है।
ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य घरेलू उत्पादन को गति देना है। एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने कहा, “उन्हें पर्याप्त चेतावनी दी गई थी और हम इसे लागू करने जा रहे हैं।
120-180 दिन की मोहलत
इस टैरिफ के लिए ट्रंप प्रशासन ने बड़ी दवा कंपनियों को 120 दिनों की समय सीमा दी गई है और ये इस गर्मी के अंत में लागू होंगे, जबकि छोटी कंपनियों को अनुपालन के लिए 180 दिन मिलेंगे। हालांकि, इस आदेश में व्यापक छूटें शामिल हैं। जो कंपनियां मूल्य निर्धारण पहल में शामिल होने या अमेरिका में विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने के लिए सहमत होती हैं, वे टैरिफ में काफी कमी कर सकती हैं या उनसे बच सकती हैं। जो कंपनियां अपना प्रोडक्शन अमेरिका में ट्रांसफर करती हैं, उनके लिए टैरिफ 20 प्रतिशत तक कम हो सकता है।
इसके अतिरिक्त, यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया और स्विट्जरलैंड सहित मौजूदा व्यापार समझौते वाले क्षेत्रों में स्थित कंपनियों को लगभग 15 प्रतिशत कम टैरिफ का सामना करना पड़ेगा, जबकि ब्रिटेन स्थित कंपनियों पर लगभग 10 प्रतिशत टैरिफ लागू होगा। ट्रंप प्रशासन ने पहले ही एक दर्जन से अधिक दवा कंपनियों के साथ समझौते कर लिए हैं, जिनमें मूल्य निर्धारण में रियायत और घरेलू निवेश के बदले अस्थायी टैरिफ राहत की पेशकश की गई है।
मेटल इंपोर्ट से जुड़े नियम सख्त
दवा उत्पादों को बढ़ावा देने के साथ-साथ, ट्रंप ने विदेशी निर्यातकों द्वारा कीमतों में हेरफेर करने के उद्देश्य से इस्पात, एल्युमीनियम और तांबे के आयात पर शुल्क में संशोधन करने वाले आदेश पर हस्ताक्षर किए। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम इसी उद्देश्य से उठाया गया है। नए नियमों के तहत, प्राथमिक धातुओं पर मौजूदा 50 प्रतिशत टैरिफ की गणना अब घोषित निर्यात मूल्यों के बजाय अमेरिकी खरीद मूल्यों के आधार पर की जाएगी।
यह कदम ट्रंप की व्यापार रणनीति में एक बड़ा बदलाव दर्शाता है, खासकर इस साल की शुरुआत में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद जिसने उनकी कुछ पिछली टैरिफ शक्तियों को सीमित कर दिया था।


