छतीसगढ़ में माओवादी हिंसा प्रभावित 31000 आदिवासियों की होगी घर वापसी, बस्तर में लौटेगी रौनक

बस्तर में माओवादी हिंसा और सलवा जुडूम (माओवाद विरोधी अभियान) के दौरान अपने ही घर से बेदखल हुए 31 हजार से अधिक आदिवासियों की घर वापसी की उम्मीद एक बार फिर जग रही है।

राज्य सरकार ने माओवादी हिंसा समाप्त होने के दावों के बीच विस्थापित आदिवासियों की पुनर्वास प्रक्रिया को तेज कर दिया है। 6,939 परिवारों के लिए बहु-विभागीय पुनर्वास योजना बनाई जा रही है।

इस योजना का नेतृत्व आदिम जाति विकास विभाग कर रहा है, जिसमें गृह, वन, कृषि, राजस्व, वित्त, शिक्षा, पंचायत और उद्योग विभागों को समन्वित किया जा रहा है।

योजना का उद्देश्य केवल घर वापसी नहीं, बल्कि सुरक्षित और स्थायी पुनर्वास सुनिश्चित करना है। इसके अंतर्गत आवास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

वर्ष 2005 के सलवा जुडूम के दौरान भड़की हिंसा ने हजारों आदिवासियों को रातों-रात अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया था। बस्तर के तीन जिलों के 667 ग्रामों से परिवार विस्थापित हुए हैं।

तेलंगाना के 60 ग्रामों में दंतेवाड़ा से 618 परिवार, सुकमा से 2,733 परिवार और बीजापुर से 994 परिवार प्रवासित हैं। आंध्र प्रदेश के 25 ग्रामों में भी विस्थापित परिवारों की संख्या उल्लेखनीय है। कुल मिलाकर, दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर जिले के 667 ग्रामों से 31,098 व्यक्ति प्रवासित हुए हैं।

प्रवासी परिवारों ने राष्ट्रीय जनजातीय आयोग में याचिका दायर की है, जिसके तहत आयोग ने एक माह के भीतर सर्वेक्षण कर सूची उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। वहीं, अपर मुख्य सचिव (गृह) मनोज कुमार पिंगुआ की अध्यक्षता में गुरुवार को विस्थापितों के पुनर्वास के लिए गठित राज्य स्तरीय अंतरविभागीय समिति की पहली बैठक मंत्रालय में हुई।

पिंगुआ ने वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से बस्तर संभागायुक्त डोमन सिंह और पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज सुन्दरराज पी से चर्चा कर प्रवासित परिवारों के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त करने एक बार और सीमावर्ती राज्यों के अधिकारियों से संपर्क करने के लिए कहा।

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