हरियाणा में निजी बैंकों द्वारा सरकारी विभागों के फंड में किए गए करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े की जांच अब सीबीआइ करेगी। बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं को देखते हुए प्रदेश सरकार ने सीबीआइ जांच की सिफारिश कर दी है।
वहीं, जांच में अपेक्षित सहयोग नहीं कर रहे निजी बैंकों पर सख्त रुख दिखाते हुए सोमवार को हरियाणा पुलिस और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने प्रदेश भर में संयुक्त कार्रवाई करते हुए आइडीएफसी फर्स्ट बैंक, एयू स्माल बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक की सैकड़ों शाखाओं के ताले दो घंटे तक नहीं खुलने दिए। इस दौरान सभी शाखाओं के सामने बड़ी संख्या में पुलिस कर्मचारी तैनात रहे और किसी को अंदर नहीं जाने दिया। जांच पूरी होने के बाद स्थिति सामान्य हुई।
पंचकूला, पानीपत, सोनीपत, यमुनानगर, भिवानी, कैथल, रोहतक, जींद, झज्जर, हिसार सहित विभिन्न जिलों में सुबह बैंक शाखाओं के खुलने से पहले ही पुलिस टीमें पहुंच गईं थी। पुलिस की मौजूदगी के चलते शुरुआती समय में बैंक का कामकाज प्रभावित रहा और कर्मचारियों को शाखाओं के ताले खोलने की अनुमति नहीं दी गई। इस दौरान बैंक स्टाफ बाहर ही खड़ा रहा।
सुबह करीब साढ़े दस बजे तक न तो बैंक कर्मचारियों और न ग्राहकों का बैंक शाखा में प्रवेश नहीं करने दिया गया। इस दौरान बैंकों की जांच में कुछ दस्तावेज भी कब्जे में लिए गए। करीब दो घंटे बाद ही स्थिति सामान्य हो पाई। पुलिस निदेशक अजय सिंघल ने बताया कि जांच हो चुकी है। बैंक में कहीं भी आम लोगों को परेशानी नही हुई और सामान्य की भांति काम हुआ।
बता दें कि विजिलेंस और एंटी करप्शन ब्यूरो की जांच में करोड़ों रुपये के घोटाले उजागर होने के बाद कई बैंक खातों को फ्रीज किया गया है। संबंधित शाखाओं में पुलिस कार्रवाई तेज कर दी गई है। सरकार ने कई बैंकों को ब्लैकलिस्ट (डी-एम्पैनल) कर दिया है और उनके जरिए सरकारी लेनदेन पर रोक लगा दी है। अलग-अलग विभागों में फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद शिक्षा विभाग द्वारा भी सभी जिलों से बैंक खातों के ब्योरा मांगा जा चुका है।
कोटक महिंद्रा बैंक में पंचकूला नगर निगम के फिक्स्ड डिपाजिट में भारी गड़बड़ी सामने आई है। यहां 150 करोड़ से अधिक का फर्जीवाड़ा सामने आया है। बैंक रिकार्ड और निगम के रिकार्ड में बड़ा अंतर पाया गया है। आइडीएफसी बैंक में 590 करोड़ का घोटाला सामने आ चुका है। इस पूरे मामले में फर्जी डेबिट नोट और दस्तावेज इस्तेमाल हुए है। छदम कंपनियों के जरिये पैसा ट्रांसफर किया गया। कई सरकारी अधिकारी और बैंक कर्मचारी जांच के दायरे में हैं। कई संदिग्ध बैंक खातों पर डेबिट फ्रीज लगाया गया है। 100 से ज्यादा खातों की जांच की गई है।


