नौ जिलों में उर्वरकों की बिक्री में अप्रत्याशित वृद्धि से सरकार सतर्क हो गई है। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने हाथरस, खीरी, बलिया, एटा, अलीगढ़, चंदौली, कन्नौज, बदायूं और सोनभद्र में उर्वरकों की अधिक बिक्री पर चिंता जताते हुए अधिकारियों को निरंतर निगरानी रखने के लिए निर्देश दिए हैं।
मंत्री ने कहा कि यदि बिक्री और स्टाक की निगरानी में कोई लापरवाही मिली तो अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाएगी।
कृषि मंत्री ने सोमवार को वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के सभी संयुक्त निदेशकों, उप निदेशकों और जिला कृषि अधिकारियों के साथ बैठक में कहा कि वर्तमान रबी सीजन में 30 मार्च प्रदेश में 51.15 लाख टन यूरिया की उपलब्धता के सापेक्ष 39.94 लाख टन यूरिया की बिक्री हुई है।
यह पिछले वर्ष के मुकाबले 24 प्रतिशत अधिक है। डीएपी की 17.59 लाख टन की उपलब्धता के सापेक्ष 12.48 लाख टन की बिक्री हुई है। प्रदेश में अभी भी 11.21 लाख टन यूरिया और 5.11 लाख टन डीएपी का स्टाक है।
कृषि मंत्री ने निर्देश दिए कि अवशेष बीजों का वितरण और कृषि यंत्रों का सत्यापन कार्य मंगलवर तक पूरा हो जाए। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में रबी 2025-26 के लिए 18.78 लाख किसानों के बीमा और ”विंड्स” योजना के तहत आटोमैटिक वेदर स्टेशन व रेन गेज की स्थापना में तेजी लाने के निर्देश दिए।
फार्मर रजिस्ट्री की गति बढ़ाने को कहा। सहकारिता विभाग के अधिकारियों को उर्वरक रैक से होने वाली आपूर्ति की निरंतर मानिटरिंग करने और सहकारी समितियों पर खाद की उपलब्धता का बोर्ड अनिवार्य रूप से लगवाने के भी निर्देश दिए।
बैठक में प्रमुख सचिव सहकारिता अजय कुमार शुक्ला, आयुक्त एवं निबंधक सहकारिता योगेश कुमार, प्रबंध निदेशक पीसीएफ डा. चंद्र भूषण, कृषि निदेशक डा. पंकज त्रिपाठी आदि उपस्थित रहे।
बजट व्यय में लापरवाही पर अधिकारियों के वेतन से होगी भरपाई
कृषि मंत्री ने बजट व्यय करने में लापरवाही पर संबंधित अधिकारियों के वेतन से भरपाई करने की भी चेतावनी दी। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2025-26 में 8620.65 करोड़ रुपये के बजट प्रविधान के सापेक्ष 7431.86 करोड़ रुपये की स्वीकृति जारी की जा चुकी है।
इसमें से सोमवार तक 6432.67 करोड़ रुपये का व्यय हो चुका है, जो 74.62 प्रतिशत है। केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए 3278.50 करोड़ रुपये के प्रविधान में से 2027.49 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए और 1719.15 करोड़ रुपये व्यय किए गए हैं।
राज्य सेक्टर की योजनाओं के 3773.34 करोड़ रुपये के प्रविधान के सापेक्ष 3632.40 करोड़ रुपये का व्यय हुआ है, जो स्वीकृति के सापेक्ष 95.55 प्रतिशत है।


