कंफर्म टिकट होने के बावजूद गोमती एक्सप्रेस में नहीं चढ़ सके यात्री, अनाधिकृत प्रवेश बना बड़ी समस्या

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भारतीय रेलवे की एसी और नॉन-एसी आरक्षित बोगियों में अनाधिकृत यात्रियों की बढ़ती घुसपैठ एक बार फिर यात्रियों के लिए गंभीर परेशानी का कारण बनी है। रेलवे द्वारा लगातार दावों के बावजूद जमीनी हकीकत यह है कि आरक्षित डिब्बों में बिना टिकट या वेटिंग टिकट वाले यात्रियों का प्रवेश पूरी तरह रोका नहीं जा सका है। इसका सीधा खामियाजा उन यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है, जिनके पास कंफर्म टिकट होने के बावजूद उन्हें अपनी ही ट्रेन में चढ़ने का मौका नहीं मिल पा रहा।

ताजा मामला 25 जनवरी का बताया जा रहा है, जब नई दिल्ली से चलकर गोरखपुर जाने वाली 12420 गोमती एक्सप्रेस में भारी अव्यवस्था देखने को मिली। इस ट्रेन में गाजियाबाद से कानपुर की यात्रा कर रहे यात्री नवीन सिंह चौहान और उनके परिवार के सदस्यों को कंफर्म टिकट होने के बावजूद ट्रेन में प्रवेश नहीं मिल सका। भीड़ और अनाधिकृत यात्रियों की अधिक संख्या के कारण वे समय पर ट्रेन में सवार नहीं हो पाए और उनकी ट्रेन छूट गई।

पीड़ित यात्री नवीन सिंह चौहान के अनुसार, उनके पास कुल 16 कंफर्म टिकट थे, जो बोगी संख्या डी-5 में आरक्षित थे। उनके टिकट जिन पीएनआर नंबरों पर जारी किए गए थे, उनमें 2248870328, 2448869637, 2448869936 और 2610945494 शामिल हैं। सभी टिकट पूरी तरह कंफर्म होने के बावजूद, बोगी में पहले से मौजूद अवैध यात्रियों और अत्यधिक भीड़ के चलते उनके परिवार के लिए अंदर प्रवेश कर पाना असंभव हो गया।

यात्रियों का आरोप है कि प्लेटफॉर्म पर मौजूद रेलवे स्टाफ और सुरक्षा कर्मी भीड़ को नियंत्रित करने में पूरी तरह विफल रहे। आरक्षित कोच के दरवाजों पर बिना टिकट यात्रियों की भारी भीड़ जमा थी, जिससे वैध यात्रियों को ट्रेन में चढ़ने का अवसर नहीं मिल सका। कई यात्रियों ने ट्रेन रवाना होने से पहले रेलवे अधिकारियों को इस अव्यवस्था की जानकारी देने की कोशिश की, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

घटना के बाद पीड़ित यात्रियों ने रेलवे के संबंधित अधिकारियों के पास औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में यह स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि कंफर्म टिकट होने के बावजूद उन्हें यात्रा से वंचित होना पड़ा, जो रेलवे की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यात्रियों ने न केवल टिकट की पूरी राशि वापस करने की मांग की है, बल्कि मानसिक उत्पीड़न और समय की क्षति के लिए मुआवजे की भी मांग उठाई है।

रेलवे की ओर से मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि संबंधित ट्रेन, बोगी और ऑन-ड्यूटी स्टाफ की रिपोर्ट तलब की गई है। यदि जांच में लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि यह कोई पहला मामला नहीं है। आए दिन सोशल मीडिया और रेलवे हेल्पलाइन पर ऐसी शिकायतें सामने आती रहती हैं, जहां कंफर्म टिकटधारी यात्रियों को आरक्षित कोचों में जगह नहीं मिलती। यात्रियों का कहना है कि जब टिकट कंफर्म होने के बावजूद यात्रा सुरक्षित नहीं है, तो आरक्षण प्रणाली का उद्देश्य ही खत्म हो जाता है।

अब देखना यह होगा कि रेलवे इस मामले में क्या ठोस कदम उठाता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या व्यवस्था करता है।

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