स्पीकर अब्दुल रहीम राथर ने प्रदेश सरकार को फर्जी खबरों और भ्रामक सूचनाओं से निपटने के लिए एक व्यापक कानून बनाने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए अन्य राज्यों में लागू कानूनों का अध्ययन किया जाएगा और उसके आधार पर जम्मू-कश्मीर के लिए प्रभावी कानून तैयार होगा।
विधानसभा में शुक्रवार को तथाकथित इंटरनेट मीडिया पर पोर्टल व अन्य मंचों पर फर्जी खबरों को फैलाए जाने के मुद्दे पर बहस हुई। जिसमें सत्ताधारी नेकां, कांग्रेस, पीडीपी, निर्दलीय व विपक्ष भाजपा के विधायक एकजुट नजर आए। सभी ने एकमत से फर्जी खबरों की रोकथाम के लिए व्यापक नीति या कानून लाए जाने पर जोर दिया।
भाजपा विधायक आरएस पठानिया ने फर्जी खबरों पर अंकुश लगाने के लिए कानून बनाए जाने की मांग की। इसमें जवाबदेही व विश्वसनीयता बरकरार रखी जानी चाहिए। इंटरनेट मीडिया पर पोर्टल व विभिन्न माध्यमों से झूठा वर्णन बनाया जाता है। तथ्यों की जांच व नियम बनाए जाएं। जम्मू-कश्मीर में बिना पंजीकरण के कई आनलाइन पोर्टल और पेज संचालित हो रहे हैं, जिन पर कोई नियंत्रण नहीं है।
मोबाइल लेकर सभी रिपोर्टर बन रहे
कांग्रेस विधायक इफ्तिखार अहमद ने कहा कि हाल यह है कि एक मोबाइल लेकर सभी रिपोर्टर बन रहे हैं। फर्जी व गुमराह करने वाली खबरों से अफरा-तफरी फैलाई जा रही है। नेकां से नजीर अहमद गुरेजी ने कहा कि इंटरनेट मीडिया पर फर्जी खबरें फैला कर लोगों के बीच हमें बदनाम किया जाता है। इससे हमें अपने इलाकों के लोगों को जवाब देना मुश्किल हो रहा है।
आरोप लगाया कि इन खबरों को पीडीपी वालों ने अपने हैंडल से आगे भेज दिया। पीडीपी विधायक रफीक अहमद नाईक ने कहा कि कई न्यूज चैनलों ने आपरेशन सिंदूर के दौरान गुमराह करने वाली खबरें फैलाई। विधायक रामेश्वर सिंह ने कहा कि इंटरनेट मीडिया पर फर्जी खबरें फैलाने वालों के खिलाफ सख्त नीति बनाई जाए। इस चर्चा में 14 विधायकों और एक मंत्री ने हिस्सा लिया।
उपमुख्यमंत्री सुरेंदर चौधरी ने चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि मीडिया संस्थानों को आत्ममंथन करना होगा और यह तय करना होगा कि वे किस दिशा में जाना चाहते हैं। उन्होंने राजनीतिक दलों से भी यह सोचने को कहा कि ऐसे लोगों को सामग्री कौन उपलब्ध कराता है, जो फर्जी न्यूज फैलाने में भूमिका निभाते हैं। राजनीतिक पार्टियों को अपने गिरेबान में झांकना चाहिए।
गैलरी में अधिकारी न रहने पर स्पीकर भड़के
विधानसभा में जब फर्जी खबरों की रोकथाम के मुद्दे पर बहस हो रही थी तब आफिसर गैलरी में सूचना विभाग के सचिव व निदेशक मौजूद नहीं थे। इस पर स्पीकर राथर भड़क गए और उन्होंने कहा कि ऐसा लापरवाह रवैया नहीं होना चाहिए। जिस मुद्दे पर बहस हो रही है, उससे संबंधित अधिकारी ही मौजूद नहीं हैं। इस पर नेकां विधायक नजीर अहमद गुरेजी ने कहा कि अधिकारियों को किसी डर नहीं है।


