राज्य महिला आयोग ने छह माह से अलग रह रहे पति-पत्नी का मेल करवाया है। महिला आयोग ने दोनों की काउंसिलिंग की और वे साथ रहने के लिए तैयार हो गए। शिमला में सुनवाई के दौरान दोनों के विवाद को सुलझाया गया।
यह मामला पारिवारिक हस्तक्षेप और आपसी मतभेदों के कारण काफी समय से उलझा हुआ था। शुक्रवार को सुनवाई में 25 मामलों को सूचीबद्ध किया था। इनमें से 18 मामलों में दोनों पक्ष आयोग के समक्ष उपस्थित हुए।
इनमें से सुनवाई के दौरान 10 मामलों का निपटारा कर उन्हें बंद कर दिया। इसके अलावा सात मामलों में आगे सुनवाई होनी है। इसमें एक मामला काफी गंभीर था। पति-पत्नी के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद को सुलझाने के लिए विशेष प्रयास किए गए।
इसमें आयोग के लिए संतोषजनक बात यह रही कि दोनों पक्ष सुनवाई में मौजूद थे और काउंसिलिंग के लिए तैयार हो गए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद पाया कि परिवार के सदस्यों के ज्यादा हस्तक्षेप के चलते जीवन में परेशानियां हैं। दोनों पक्षों के साथ उनके परिवार के अन्य सदस्यों को भी समझाया।
आयोग ने सभी की काउंसिलिंग की और उन्हें आपसी समझ व पारिवारिक संतुलन बनाए रखने के महत्व के बारे में समझाया। पति-पत्नी भी मतभेद भुलाकर फिर से साथ रहने के लिए तैयार हो गए।
राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष विद्या नेगी ने बताया कि एक मामले को सुलझाते हुए महिला को पति के साथ भेज दिया है। सात मामलों में आगे सुनवाई होनी है। शनिवार को 32 मामलों की सुनवाई प्रस्तावित है। इस दौरान वैवाहिक जीवन में हस्तक्षेप कम करने की दिशा में काम करने की सलाह भी दी गई।


