ईरान-इजरायल युद्ध का भारतीय अर्थव्यवस्था पर दुष्प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। गैस सिलिंडर के लिए परेशान उपभोक्ता त्राहिमाम कर रहे हैं।
वहीं, अब इसकी आंच में टोल प्लाजा भी झुलसते नजर आ रहे हैं। जागरण की पड़ताल में यह सामने आया है कि 24 घंटे में जितने वाहन 15 दिन पहले तक गुजर रहे थे, उनकी संख्या आधी से भी कम रह गई है। इस स्थिति को लेकर एनएचएआइ के माथे पर बल दिखने लगा है। टोल प्लाजा से होने वाली आमदनी से ही सड़क निर्माण और स्टाफ का खर्चा निकलता है।
मूलभूत जरूरत प्रभावित
युद्ध के कारण हर मूलभूत जरूरत प्रभावित होती दिख रही है। गैस की कमी के कारण घरों के चूल्हे ठंडे हो गए हैं, और अब गैस आधारित वाहन भी लोग चलाने से कतरा रहे हैं। जागरण टीम ने शुक्रवार को पड़ताल की, तो चौकाने वाली रिपोर्ट सामने आई। रुद्रपुर से किच्छा जाने वाले राजमार्ग पर पंतनगर के पास स्थित नगला टोल प्लाजा पर वाहनों की संख्या बहुत कम दिखी।
काफी देर तक प्लाजा पर सन्नाटा पसरा रहा। टोल प्लाजा के मैनेजर अमित चौधरी ने बताया कि 19 मार्च से वाहनों की आवाजाही में काफी कमी आई है। 10 मार्च को 24 घंटे के भीतर वाहनों की गुजरने की संख्या करीब 3680 थी, जो 15 मार्च को घटकर 3076 हो गई। 17 और 18 मार्च को यह संख्या 2200 से 2500 के बीच रही।
19 मार्च को 2087 वाहन गुजरे, और गुरुवार व शुक्रवार को यह आंकड़ा घटकर 1289 वाहनों का हो गया। मैनेजर अमित चौधरी का कहना है कि इस टोल प्लाजा से प्रतिदिन करीब साढ़े तीन से चार लाख रुपये की आमदनी वाहनों से टोल टैक्स के रूप में हो रही थी, जो अब घटकर एक से डेढ़ लाख रुपये रह गई है। कुछ इसी तरह की स्थिति जसपुर-काशीपुर के बीच जगतपुर पट्टी में पड़ने वाले टोल प्लाजा की भी बताई जा रही है।
टोल प्लाजा पर मौजूद स्टाफ ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस टोल प्लाजा से होकर हरियाणा, हरिद्वार, पानीपत, रुड़की, पंजाब तक के वाहन दिन-रात गुजरते हैं। यह सर्वाधिक आवाजाही वाले राष्ट्रीय राजमार्गों की श्रेणी में शामिल है। यहां से 24 घंटे में 15 मार्च से पहले तक साढ़े आठ हजार वाहन गुजरते थे, जो अब घटकर लगभग पांच हजार रह गई है। वाहनों की तेजी से घटने की यही स्थिति खटीमा के बनूसी टोल प्लाजा और किच्छा-सितारगंज के बीच देवरिया टोल प्लाजा की भी है।
दोनों स्थानों पर वाहनों की संख्या आधी बताई जा रही है। टोल प्लाजा पर कुल वाहनों की संख्या में तेजी से कमी आ रही है, लेकिन इनमें से कार और ट्रकों की संख्या सबसे ज्यादा कम हो रही है। नगला टोल प्लाजा के मैनेजर अमित चौधरी का कहना है कि सीएनजी कारों की मांग तेजी से बढ़ी है, जिससे लगता है कि उन कारों की संख्या कम हुई होगी। तेल संकट के कारण ट्रकों की संख्या भी कम हो रही है। कार और ट्रकों की संख्या में कमी का आंकड़ा जसपुर-काशीपुर के बीच जगतपुर पट्टी में स्थित टोल प्लाजा का भी है।


