सतह पर आई भाकियू (टिकैट) की अंतर्कलह, 4 मंडलों के अध्यक्ष समेत 1800 पदाधिकारी-कार्यकर्ताओं ने छोड़ा संगठन?

भारतीय किसान यूनियन (टिकैट) में अंदरखाने चल रहीं अंतर्कलह को तब खुले मंच पर आ गई, जब मध्यांचल जोन के अध्यक्ष ने चार मंडल व 19 जनपदों के जिलाध्यक्ष सहित 1800 कार्यकर्ताओं के इस्तीफा का ऐलान कर दिया। हालांकि राष्ट्रीय नेतृत्व मामले को बातचीत से सुलझाने की बात कह रहा है, लेकिन इस घटनाक्रम ने यूनियन में खलबली मचा दी।

महापंचायत में कई प्रदेशों के पदाधिकारी-कार्यकर्ता रहे

भाकियू के मध्यांचल यूपी के अध्यक्ष सालिकराम यादव की अगुवाई में गुरुवार को खरकौनी में महा पंचायत हुई। इसमें प्रयागराज के अलावा अन्य प्रदेश के अन्य जनपदों के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। कहने के लिए तो पंचायत किसानों की समस्याओं पर चर्चा हो लेकर हुई थी, लेकिन इसमें सबसे लंबा विमर्श संगठन में चल रही खींचतान पर हुआ।

किसान नेताओं से दुर्व्यवहार का आरोप

मध्यांचल यूपी के अध्यक्ष और मध्यांचल उपाध्यक्ष सूरज पाल सिंह मौर्या ने आरोप लगाया कि यूनियन में कुछ माफिया प्रवृत्ति के लोग शामिल हो गए हैं। यह किसानों व किसान नेताओं से दुर्व्यवहार करते हैं। इनके खिलाफ उठने वाली आवाज पर सुनवाई नहीं होती।

मध्यांचल अध्यक्ष ने क्या कहा?

मध्यांचल अध्यक्ष सालिकराम यादव ने दावा किया कि इन्हीं मुद्दों को लेकर उनके साथ ही लखनऊ, देवीपाटन, अयोध्या, प्रयागराज मंडलों के अध्यक्ष, अमेठी, रायबरेली, सुल्तानपुर, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, उन्नाव समेत 19 जनपदों के जिलाध्यक्ष सहित करीब 1800 पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने इस्तीफा दे दिया है।

कहा- इस्तीफा राष्ट्रीय नेतृत्व को भेजा गया

उन्होंने बताया कि यह इस्तीफा राष्ट्रीय नेतृत्व को भेजा गया है। महापंचायत में सुग्रीव सिंह, सुरेंद्र सिंह, धर्मराज रत्नाकर, राजेश्वर सिंह, अवध राज पटेल, डा. राम तीरथ, साकेत सिंह, पूर्व प्रधान तेजबली यादव आदि भी मौजूद रहे।

पदाधिकारियों में मनमुटाव नहीं : राष्ट्रीय महासचिव

उधर, यूनियन के राष्ट्रीय महासचिव राजवीर सिंह जादौन का कहना है कि यूनियन के पदाधिकारियों के बीच ऐसा कोई मनमुटाव या विवाद नहीं है। अगर, ऐसा कुछ है भी तो सब एक ही परिवार से हैं। वरिष्ठजन हैं। बातचीत कर मामले को सुलझाया जाएगा।

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