प्रदेश में गंभीर मरीजों की देखभाल को बेहतर बनाने के लिए हब-एंड-स्पोक माडल पर टेली-आईसीयू सेवाएं शुरू की जाएंगी। इसमें टेली-रेडियोलाजी सेवाओं के माध्यम से समय पर जांच और विशेषज्ञ सलाह उपलब्ध कराई जाएगी। नीति आयोग की जांच के बाद इसके लिए निविदा प्रक्रिया शुरू की गई है।
यहां एक बैठक के दौरान मुख्य सचिव अटल डुल्लू को जानकारी देते हुए स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के आयुक्त सचिव एम राजू ने बताया कि सेवा वितरण, चिकित्सा शिक्षा और आपातकालीन व ट्रामा सिस्टम पर ध्यान केंद्रित करने के लिए तीन कार्य समूह बनाए गए हैं। इसके अलावा इंस्टीट्यूट आफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज के सहयोग से लिवर ट्रांसप्लांट और उन्नत उपचार सेवाएं विकसित की जा रही हैं।
नीति आयोग से निरंतर सहयोग की आवश्यकता
स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार, बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और पूरे केंद्र शासित प्रदेश में सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। मुख्य सचिव ने नीति आयोग के साथ निरंतर सहयोग की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि इस साझेदारी से कई योजनाएं सफलतापूर्वक लागू हुई हैं। उन्होंने सरकारी मेडिकल कालेजों के प्रिंसिपलों से एमबीबीएस और पोस्टग्रेजुएट सीटों में वृद्धि के प्रयासों की जानकारी ली।
आयुक्त सचिव राजू ने बताया कि एमबीबीएस और पोस्टग्रेजुएट शिक्षा के विस्तार के साथ एमबीबीएस, शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेज और सरकारी मेडिकल कालेजों के बीच सहयोग बढ़ाया जा रहा है। इसके तहत फैकल्टी एक्सचेंज, संयुक्त शोध, शैक्षणिक संसाधनों का साझा उपयोग और वर्चुअल मेडिकल बोर्ड की स्थापना शामिल है।
व्यापक रणनीति तैयार की जा रही
खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण के साथ मिलकर नियमों को मजबूत करने के लिए व्यापक योजना लागू की जा रही है। इसमें पर्यटन सीजन पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। कैंसर देखभाल के लिए आइसीएमआर के साथ मिलकर एक व्यापक रणनीति तैयार की जा रही है, जिसमें कैंसर रजिस्ट्री, मालिक्यूलर आन्कोलाजी सेंटर और रोकथाम कार्यक्रम शामिल हैं।
नशा मुक्ति और मानसिक स्वास्थ्य के लिए 900 से अधिक काउंसलरों को प्रशिक्षित किया जा चुका है और पूरे प्रदेश में सर्वेक्षण की योजना बनाई गई है। डेंटल और निवारक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के तहत मोबाइल डेंटल यूनिट्स, टेली-डेंटिस्ट्री और ओरल कैंसर स्क्रीनिंग को बढ़ावा दिया जाएगा।


