गर्मी में शरीर को अंदर से ठंडा रखेगा ‘गुलकंद’, गैस और बदहजमी भी होगी छूमंतर; पढ़ें रेसिपी

 गर्मियों का मौसम आते ही चिलचिलाती धूप और पसीने से बुरा हाल हो जाता है। ऐसे में हम अक्सर फ्रिज का ठंडा पानी या बर्फ वाली कोल्ड ड्रिंक्स पीकर राहत पाने की कोशिश करते हैं, लेकिन ये चीजें शरीर को अंदर से नुकसान पहुंचाती हैं। तो फिर भयंकर गर्मी को मात देने का असली और देसी तरीका क्या है? इसका जवाब है- गुलकंद।

जी हां, गुलाब की ताजी पंखुड़ियों से बना गुलकंद सिर्फ स्वाद में ही मीठा और लाजवाब नहीं होता, बल्कि यह हमारी सेहत के लिए किसी जादू से कम नहीं है। आयुर्वेद में भी इसे एक बेहतरीन ‘कूलिंग टॉनिक’ माना गया है।

गर्मियों में पेट को ठंडा रखने का घरेलू उपाय

गर्मियों में गुलकंद का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे गैस, एसिडिटी, सीने की जलन और बदहजमी जैसी पेट की तमाम बीमारियां छूमंतर हो जाती हैं। इसके अलावा, अगर आपको गर्मी की वजह से बार-बार मुंह में छाले होते हैं, नाक से खून आना या बहुत ज्यादा थकान महसूस होती है, तो गुलकंद आपके लिए एक अचूक दवा साबित हो सकता है।

बाजार का गुलकंद तो आपने बहुत खाया होगा, लेकिन जो स्वाद और सेहत घर के बने शुद्ध गुलकंद में है, वो कहीं और कहां। आइए, बिना देर किए जानते हैं इसे घर पर बनाने की सबसे आसान विधि।

गुलकंद बनाने के लिए सामग्री

  • देसी गुलाब की ताजी पंखुड़ियां: 250 ग्राम
  • धागे वाली मिश्री: 250 ग्राम (पिसी हुई)
  • सौंफ का पाउडर: 1 छोटा चम्मच
  • छोटी इलायची का पाउडर: आधा चम्मच
  • एक साफ कांच का जार

गुलकंद बनाने की विधि

  • सबसे पहले गुलाब की ताजी पंखुड़ियों को पानी से अच्छी तरह धो लें। इसके बाद इन्हें एक साफ सूती कपड़े पर फैलाकर पंखे की हवा में सुखा लें ताकि इनका सारा पानी अच्छी तरह सूख जाए।
  • अब इन सूखी हुई पंखुड़ियों को एक बड़े बर्तन में डालें। इसके ऊपर पिसी हुई मिश्री, सौंफ और इलायची पाउडर डालकर हाथों से अच्छी तरह मिला लें। आप चाहें तो हथेलियों से पंखुड़ियों को हल्का-सा मसल भी सकते हैं।
  • इस तैयार मिश्रण को कांच के जार में भर दें। ध्यान रहे कि जार अंदर से बिल्कुल सूखा और साफ होना चाहिए, वरना गुलकंद खराब हो सकता है।
  • अब इस कांच के जार का ढक्कन मजबूती से बंद करके इसे 10 से 15 दिनों के लिए अपने घर की छत या बालकनी में तेज धूप में रख दें।
  • हर एक-दो दिन में जार को खोलकर एक सूखे और साफ चम्मच से गुलकंद को ऊपर-नीचे करते रहें।
  • लगभग दो हफ्तों में मिश्री पूरी तरह पिघल जाएगी और गुलाब की पंखुड़ियां नर्म होकर इस मीठी चाशनी में अच्छी तरह घुल-मिल जाएंगी। बस, आपका स्वादिष्ट और 100% शुद्ध गुलकंद बनकर तैयार है।
  • आप रोजाना सुबह खाली पेट या रात को सोने से पहले एक चम्मच गुलकंद को एक गिलास ठंडे दूध या सादे पानी के साथ ले सकते हैं। बच्चे हों या बड़े, यह हर किसी के लिए बेहद फायदेमंद है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *