जमरानी बांध योजना: बरेली-रामपुर तक पानी पहुंचाने को बन रही नहरें, वन्यजीवों के लिए विशेष रास्ते

जमरानी बांध से उत्तर प्रदेश तक पानी पहुंचाने के लिए जंगल क्षेत्र में भी नहरों का निर्माण किया गया है। ऊधम सिंह नगर के हरिपुरा जलाशय से पानी रामपुर और किच्छा डैम से होकर पानी बरेली तक पहुंचेगा।

हरिपुरा जलाशय तक आपूर्ति करने के लिए टांडा जंगल में भी नहर बनाई गई है। इस जंगल में हाथियों समेत हिरन व अन्य वन्यजीव तथा सरीसृपों की विभिन्न प्रजाति की मौजूदगी है। अब नहर बनने से वन्यजीवों के पारंपरिक रास्ते में बाधा उत्पन्न न हो, इसलिए एलिफेंट स्टेप्स औैर रेप्टाइल क्रासिंग भी बनाई जा रही हैं।

नैनीताल जिले के अमृतपुर में बन रहे जमरानी बांध से उत्तर प्रदेश के रामपुर और बरेली जिले से जुड़े 684 गांवों की 1,15,582 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई के लिए पानी दिया जाना है। हल्द्वानी के लोगों की प्यास बुझाने के साथ ही ऊधम सिंह नगर को भी पेयजल आपूर्ति होगी। बांध से पानी काठगोदाम पहुंचेगा।

इसके बाद यहां से अगल-अलग नहरों के जरिये पानी आगे बढ़ेगा। कुल 40.82 किमी लंबी नहरें तैयार की जानी है। जिसमें से 17.38 किमी दायरे में काम हो चुका है। हरिपुरा जलाशय की तरफ पानी पहुंचाने के लिए टांडा पुलिस चौकी से अंदर की तरफ भी नहर बनाई गई है। यहां एक कच्ची सड़क है, जो लोगों को जंगल होते हुए सीधा डैम तक पहुंचा देती है। जंगल में रहने गुर्जर परिवारों के साथ भी वनकर्मी भी इसका इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा वन्यजीवों के लिए भी एक से दूसरे जंगल में पहुंचने का यह पुराना और पांरपरिक रास्ता है।

इस नहर को पार करने में बाघ, गुलदार और हिरण प्रजाति को भले अधिक दिक्कत न हो लेकिन भारी भरकम शरीर होने के कारण हाथियों को नीचे उतरने में दिक्कत आएगी। वहीं, सांप व अन्य सरीसृप प्रजाति के लिए भी नहर बाधक बन सकती है। इसलिए जमरानी परियोजना इकाई की ओर से एलिफ्रेट स्टेप्स और रेप्टाइल क्रासिंग बनाई जा रही है।

इस तरह पार होंगे हाथी और सरीसृप
चार मीटर चौड़ी और दो मीटर गहरी नहर के दोनों तरफ हाथी के चलने लायक चौड़ी सीढ़ियां तैयार की जाएगी। ताकि हाथी नहर पार कर दूसरे जंगल में पहुंच सके। इस निर्माण को एलिफेंट स्टेस्प कहा गया है।

इसके अलावा अलग-अलग जगहों पर नहर के तल पर हृयूम पाइप (गोल पाइप) फिट किए जाएंगे। जिसके दोनों हिस्सें भूमिगत होकर नहर के दोनों छोरों से बाहर की ओर होंगे। सांप व अन्य सरीसृप प्रजाति एक तरफ से अंदर घुसने के बाद दूसरी तरफ पहुंच जाएगी।

1090 पेड़ों के कटान के बाद बढ़ेगी रफ्तार
एडीएम शैलेंद्र सिंह नेगी ने गुरुवार को अफसरों संग नहर से जुड़े निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। हरिपुरा फीडर से जुड़ी नहरों की गुणवत्ता भी जांची गई। नहरों के निर्माण को लेकर 1090 पेड़ों का कटान होना है। इसके बाद काम में और तेजी आएगी। पेड़ों के कटान को लेकर आवेदन भी हो चुका है।

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