राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने (NHRC) ने जम्मू-कश्मीर पुलिस महानिदेशक को घाटी में हिंदू नागरिकों व अन्य अल्पसंख्यकों की टारगेट मर्डर को रोकने में विफल होने और संबधित मामलों की जांच में लापरवाही को लेकर जरूरी कार्रवाई का निर्देश दिया है। एनएचआरसी ने पुलिस महानिदेशक को दो हफ्ते के भीतर अपनी रिपोर्ट जमा करने को कहा है।
जानकारी के अनुसार, एनएचआरसी के सदस्य प्रियांक कानूनगो की अध्यक्षता वाली एक बेंच ने एंटी टेररिज्म ग्लोबल फ्रंट (एटीजीएफ) के अध्यक्ष एडवोकेट विनीत जिंदल की शिकायत पर पुलिस महानिदेशक जम्मू कश्मीर को निर्धारित समय के भीतर जांच करने और एक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है।
शिकायतकर्ता ने नदीमर्ग हत्याकांड, जिसमें 24 कश्मीरी हिंदू मारे गए थे, 1998 के वंधामा हत्याकांड जिसमें 23 लोगों की जान गई थी, और अमरनाथ यात्रा तीर्थयात्रियों वर्ष 2000 और 2017 में हुए हमलों व अन्य आतंकी घटनाओं का अपनी शिकायत में ब्यौरा देते हुए आरोप लगाया कि इन मामलों की जांच सही नहीं हुई है। इसके अलावा कई मामलों में आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई, जिससे यह मामले अनसुलझे रह गए हैं।
उन्होंने कहा कि यह संविधान के तहत गारंटीकृत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है, जिसमें जीवन का अधिकार (आर्टिकल 21), समानता (आर्टिकल 14), और धर्म की स्वतंत्रता (आर्टिकल 25) शामिल हैं।
एडवोकेट विनीत जिंदल ने एनएचआरसी से इस मामले में हस्ताक्षेप का आग्रह करते हुए एक विस्तृत जांच, एफआईआर, गिरफ्तारी और प्रत्येक मामले से संबंधित मुकदमे की मौजूदा स्थिति, और कश्मीरी हिंदुओं व अन्य अल्पसंख्यकों की लक्षित हत्याओं की रोकथाम व उनकी सुरक्षा, और पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजा और पुनर्वास की मांग की है।
आयोग ने शिकायत का संज्ञान लेते हुए जम्मू-कश्मीर पुलिस को आरोपों की जांच करने और तय समय के अंदर एक विस्तृत रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया। आयोग ने कहा है कि इस मामले में सभी जानकारियां आयोग के वेब पोर्टल पर भी जमा की जा सकती हैं।


