संसद में उठा चंडीगढ़ में भर्तियों का मुद्दा; आउटसोर्स नियुक्तियों में पारदर्शिता क्यों नहीं? सांसद तिवारी ने मांगा जवाब

चंडीगढ़ में भर्तियों का मुद्दा संसद तक पहुंच गया है। कांग्रेस से सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा में इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने स्थायी निवासियों के लिए पारदर्शी और निष्पक्ष भर्ती सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत जवाबदेही प्रणाली की मांग की है।

तिवारी ने श्रम और रोजगार मंत्री से पिछले पांच वर्षों तथा वर्तमान वर्ष के दौरान चंडीगढ़ रोजगार एक्सचेंज में पंजीकृत व्यक्तियों का वर्ष-वार विवरण मांगा। उन्होंने पूछा कि चंडीगढ़ प्रशासन के विभागों में अस्थायी, कॉन्ट्रैक्ट और आउटसोर्स आधार पर पंजीकृत उम्मीदवारों को किस प्रकार रोजगार प्रदान किया गया।

उन्होंने यह भी जानना चाहा कि क्या चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से कोई ऐसा नियम या आदेश जारी किया गया है, जिसके तहत 20–25 प्रतिशत आउटसोर्स भर्ती रोजगार एक्सचेंज के माध्यम से करना अनिवार्य हो।

तिवारी ने अंत में यह भी पूछा कि सरकार द्वारा एजेंसियों के माध्यम से आउटसोर्सिंग नियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए कौन-सी निगरानी प्रणाली लागू की गई है।

इस मामले में भले ही श्रम और रोजगार मंत्रालय की राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने तिवारी के सवालों का जवाब दिया। मंत्री ने केवल पिछले पांच वर्षों और वर्तमान वर्ष के दौरान रोजगार एक्सचेंज में पंजीकृत व्यक्तियों की संख्या की जानकारी दी।

मंत्री ने चंडीगढ़ रोजगार एक्सचेंज में पंजीकृत उम्मीदवारों के वर्ष-वार आंकड़े तो प्रस्तुत किए। आउटसोर्सिंग एजेंसियों के लिए निगरानी प्रणाली संबंधी सवाल के जवाब में मंत्री ने कहा कि विभागों द्वारा अनुबंध और दिशा-निर्देशों के अनुसार अनुपालन की निगरानी की जाती है।

तिवारी ने कहा कि यह जवाब भले ही औपचारिक रूप से सही है, लेकिन इसने प्रश्न के मूल बिंदु से बचते हुए किसी विशेष निगरानी प्रणाली, जांच या लागू करने के उपायों के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी।

तिवारी के इस प्रश्न पर कि क्या 20–25 प्रतिशत आउटसोर्स भर्ती रोजगार एक्सचेंज के माध्यम से करने के लिए कोई नियम मौजूद है। मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस प्रकार के कोई निर्देश जारी नहीं किए गए हैं। तिवारी ने कहा कि भले ही यह उत्तर तकनीकी रूप से स्पष्ट है, लेकिन यह बड़े प्रश्न से बचता है कि ऐसी सुरक्षा व्यवस्था क्यों नहीं बनाई गई और आउटसोर्स भर्ती में पारदर्शिता तथा निष्पक्षता कैसे सुनिश्चित की जाएगी।

इस मामले पर अपने विचार व्यक्त करते हुए, तिवारी ने कहा कि मंत्री का जवाब यह दर्शाता है कि चंडीगढ़ के निवासियों के लिए रोजगार के निष्पक्ष अवसर सुनिश्चित करने को लेकर सरकार के दृष्टिकोण में स्पष्टता और पारदर्शिता की कमी है।

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