प्रखंड में खनन विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। जहां बालू का अस्तित्व ही नहीं है, वहां 7 स्थलों को केटेगरी-1 बालू घाट घोषित कर दिया गया है। जिला खनन कार्यालय, पलामू द्वारा जारी आदेश के बाद स्थानीय स्तर पर इसे गंभीर प्रशासनिक चूक माना जा रहा है।
खनन विभाग ने पत्रांक- 382/एमओ, दिनांक 13.02.2026 के तहत बकोरिया, घुटुआ और रेवारातू पंचायतों के 7 स्थलों को बालू घाट के रूप में सूचीबद्ध किया है। इसमें घुटुआ में 4, बकोरिया में 2 और रेवारातू में 1 स्थल शामिल हैं।
हैरानी की बात यह है कि जिन जगहों को घाट घोषित किया गया है, वहां न तो कोई नदी है और न ही बालू का स्थायी स्रोत।
स्थानीय जानकारों के अनुसार, क्षेत्र में बालू का एकमात्र स्रोत औरंगा नदी है, जो इन चिह्नित स्थलों से अलग पंचायतों से होकर गुजरती है। ऐसे में बिना भौगोलिक आधार के घाट चिह्नित करना कई सवाल खड़े कर रहा है।
बिना जमीन की हकीकत देखे कागजों पर घाट घोषित करने का यह मामला प्रशासनिक लापरवाही या जल्दबाजी का नतीजा माना जा रहा है। अब देखना यह है कि जिम्मेदारों पर कार्रवाई होती है या मामला फाइलों में ही दब जाता है।
जनप्रतिनिधियों ने खोली पोल
बकोरिया पंचायत की मुखिया संतोष उरांव ने कहा कि जिन स्थानों पर बालू उठाव की बात की जा रही है, वहां एक ट्रैक्टर बालू निकालना भी संभव नहीं है।घुटुआ पंचायत की मुखिया मनीता देवी ने बताया कि सोहड़ी नाला में वर्षों पहले बालू था, लेकिन अब वहां बालू नाममात्र है, जो निर्माण कार्य के योग्य नहीं है।


