मिड-डे-मील में गैस किल्लत मामले में दो प्रधानाध्यापक निलंबित, विभाग और शासन की छवि को नुकसान पहुंचाने का आरोप

झारखंड में संपन्न हुए नगर निकाय चुनाव-2026 के परिणामों ने धनबाद की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। राज्य के सबसे महत्वपूर्ण शहरी निकायों में गिने जाने वाले धनबाद नगर निगम में इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प रहा। राजनीतिक दृष्टि से यह निगम धनबाद ही नहीं, बल्कि पूरे राज्य की सियासत का केंद्र माना जाता है, जो आकार और प्रभाव में रांची नगर निगम से भी बड़ा है।मेयर पद के चुनाव में पूर्व विधायक संजीव सिंह ने 1,14,362 मत हासिल कर निर्णायक जीत दर्ज की। उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी झामुमो समर्थित चंद्रशेखर अग्रवाल उर्फ शेखर अग्रवाल को 82,460 मत मिले, जिससे वे दूसरे स्थान पर रहे। कांग्रेस के शमशेर आलम (59,079) तीसरे और भाजपा के संजीव अग्रवाल (57,895) चौथे स्थान पर रहे।

चुनाव परिणाम सामने आने के साथ ही धनबाद की राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। मेयर बने संजीव सिंह और उनके समर्थक इसे बड़े जनादेश के रूप में देख रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सिंह अब 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुट सकते हैं। उनके समर्थक सोशल मीडिया पर उन्हें धनबाद का संभावित अगला सांसद तक बताने लगे हैं।

वहीं, हार के बावजूद चंद्रशेखर अग्रवाल ने अपने प्रदर्शन से नई राजनीतिक जमीन तैयार की है। झामुमो के दृष्टिकोण से देखें तो यह अब तक का सबसे बेहतर प्रदर्शन माना जा रहा है। धनबाद जैसे क्षेत्र में, जहां पार्टी को सीमित सफलता मिली है, वहां 82 हजार से अधिक मत हासिल करना एक बड़ा संकेत माना जा रहा है।

गुरुवार को अग्रवाल ने अग्रसेन भवन में कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर उनका मनोबल बढ़ाया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि चुनाव में हार-जीत सामान्य प्रक्रिया है और जो लोग उनके साथ खड़े रहे, उनके सुख-दुख में साथ देना उनकी प्राथमिकता होगी।

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