विक्रमशिला सेतु के अस्तित्व पर बढ़ा खतरा, 2 पिलरों के फाउंडेशन का प्रोटेक्शन वॉल खिसका

भागलपुर को कोसी-सीमांचल सहित देश के विभिन्न हिस्सों को जोड़ने वॉल विक्रमशिला सेतु के दो पिलरों का प्रोटेक्शन वॉल खिसक गया है। गंगा की धार में दो पिलरों के प्रोटेक्शन वॉल के वॉल के खिसकने के कारण पिलर ध्वस्त होने की संभावना बढ़ गई है। इससे 26 साल पूर्व चालू हुए विक्रमशिला सेतु के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है।

चार माह पहले एनएच विभाग के अधिकारियों की टीम नाव से इस पुल की स्थिति का जायजा लिया गया था। इस दौरान खिसक रहे दो पिलरों के प्रोटेक्शन वॉल की जांच की। धीरे-धीरे प्रोटेक्शन वॉल काफी अधिक खिसक गया है।अनुमान लगाया जा रहा है कि तीन माह के दौरान तीन-चार फीट से अधिक प्रोटेक्शन वॉल खिसका है। यदि समय रहते प्रोटेक्शन वॉल का निर्माण नहीं किया गया तो धीरे-धीरे खिसकने का दायरा बढ़ता जाएगा और इससे पुल के अस्तित्व पर खतरा बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में पुल को बचाने के लिए भारी वाहनों के परिचालन पर रोक भी लगाया जा सकता है।

एनएच विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पानी के धार से पिलरों को बचाने के लिए प्रोटेक्शन वॉल बनाया जाता है। घेरा नहीं बनाने पर पानी के करंट से मिट्टी दरक सकता है, इसलिए पिलरों का प्रोटेक्शन वॉल बनाया जाता है। उन्होंने बताया कि प्रोटेक्शन वॉल की जांच के लिए पुल निर्माण निगम लिखा भी गया है। पानी और कम होने के बाद ही प्रोटेक्शन वॉल बनाया जा सकता है।

एनएच के कार्यपालक अभियंता का कहना है कि पानी के करंट को रोकने के लिए पिलरों के प्रोटेक्शन वॉल बनाए गए हैं। मंगलवार को पुल निर्माण निगम के अभियंता के साथ स्थल निरीक्षण करने के बाद ही वास्तविक स्थिति की सही जानकारी हो पाएगी।

‘पिलरों पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा’

उन्होंने कहा कि पिलर 60 मीटर नीचे है, इसलिए प्रोटेक्शन वॉल के खिसकने से पिलरों पर बहुत ज्यादा असर पड़ने की उम्मीद कम है। इसके बावजूद स्थिति के अनुसार निर्णय लिया जाएगा। जरूरत पड़ने पर भारी वाहनों के संचालन पर रोक लगाया जा सकता है। जांच के आधार पर पिलरों के प्रोटेक्शन वॉल को दुरुस्त किया जाएगा।

इधर, पिलरों के प्रोटेक्शन वॉल खिसकने के साथ ही पूर्वी बिहार की लाइफलाइन इस सेतु के एक्सपेंशन ज्वाइंट की दरारें भी बढ़ती ही जा रही है। वाहनों के दवाब में एक्सपेंशन ज्वाइंट के बीच गैप नौ इंच तक बढ़ने से इसके बियरिंग पर असर पड़ा है।

एक्सपेंशन ज्वाइंट के खराब होने से वाहनों का परिचालन प्रभावित होने के साथ ही दुर्घटना होती रहती है। पिछले 19 महीने में दस से अधिक बार मुख्यालय को पत्र लिखने के बावजूद विशेषज्ञों से सेतु की जांच नहीं कराई गई। हाल में भी एनएच भागलपुर प्रमंडल कार्यालय इस संबंध में मुख्य अभियंता को लेटर लिखा गया था।

व्यवस्था को ठीक कर पुल को बचाने की दिशा में ठोस कदम उठाने के बजाय अभी तक पुल निर्माण निगम के जांच रिपोर्ट का ही इंतजार किया जा रहा है।

पुल निर्माण निगम की लापरवाही

पुल की जांच करने वॉल पुल निर्माण निगम लापरवाह बना हुआ है। एनएच के कार्यपालक अभियंता के आग्रह पर मुख्य अभियंता ने पुल निर्माण निगम से सेतु की जांच कर रिपोर्ट करने के लिए कहा था। लेकिन पुल निर्माण निगम के अधिकारियों ने निर्देशों की अनदेखी कर जांच कर रिपोर्ट नहीं दी गई।

सेतु के पोल संख्या 89, 113, 125, 141, 148, 128 सहित 13 से अधिक जगहों में एक्सपेंशन ज्वाइंट का गैप ज्यादा बढ़ गया है। गैप बढ़ने से सेतु के ऊपर से इसके नीचे का हिस्सा दिखाई दे रहा है। इसका मुख्य कारण इस पुल की बियरिंग खराब होना बताया जाता है। जिसके कारण एक्सपेंशन ज्वाइंट का गैप बढ़ रहा है। इसकी वजह वाहनों के उन जगहों से गुजरने पर धड़ाम-धड़ाम की आवाज होती है।

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