झारखंड रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय के लिए स्थायी भवन का निर्माण खूंटी में होना था। लेकिन 12.10 करोड़ रुपये इसपर खर्च होने के बाद निर्माण कार्य बंद कर दिया गया। भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है।
इसमें कहा गया है कि झारखंड रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय के भवन निर्माण के अलावा झारखंड भवन निर्माण कारपोरेशन लिमिटेड की छह अन्य ऐसी परियोजनाएं हैं, जिनमें 13.32 करोड़ रुपये खर्च कर निर्माण कार्य विभिन्न कारणों से रोक दिया।
जून, 2018 में शुरू हुआ था परिसर का निर्माण
रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय के स्थायी परिसर का निर्माण कार्य जून 2018 में शुरू किया गया था, जिसे मई 2020 तक पूरा होना था। लेकिन दिसंबर 2022 में इसका निर्माण कार्य स्थगित कर दिया गया। इसके बाद जुलाई 2021 में निर्माण कार्य बंद हो गया। इस आधे-अधूरे संरचना पर राज्य सरकार 12.10 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी थी।
रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार ने कारपोरेशन को विश्वविद्यालय के लागू पाठ्यक्रम के पुनर्मूल्यांकन करने के लिए इसके स्थायी परिसर के निर्माण को स्थगित करने के निर्देश दिए गए थे ताकि विश्वविद्यालय के लिए एक स्थायी परिसर की स्थापना की आवश्यकता का आकलन किया जा सके।
19 प्रतिशत निर्माण के बाद हो गया कार्य
विभाग से किसी भी आगे के निर्देश के अभाव में 19 प्रतिशत ही निर्माण होने के बाद निर्माण कार्य बंद कर दिया गया। अधूरी संरचना अब भी बेकार पड़ी है। इसी तरह, रांची के पिठौरिया स्थित सुतियांबे पहाड़ के विकास का कार्य कारपोरेशन को अक्टूबर 2017 तक करना था। लेकिन इस अवधि तक आठ प्रतिशत ही काम हुआ था।
कार्य की धीमी प्रगति के बावजूद कारपोरेशन ने इसमें तेजी लाने का कोई प्रयास नहीं किया। अगस्त 2020 में ठेकेदार ने केवल 58 प्रतिशत काम पूरा कर बिल भुगतान का दावा किया। इसपर कारपोरेशन ने एक माह में काम पूरा करने की शर्त पर बिल का भुगतान किया।
शर्त के अनुसार, काम पूरा नहीं करने पर भी उसके विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं हुई। आंशिक रूप से पूर्ण की गई संरचना तीन वर्ष से अधिक समय से बेकार पड़ी है, जबकि इसपर कारपोरेशन ने 2.16 करोड़ रुपये खर्च कर दिए। इसी तरह अन्य कई परियाेजनाओं में राशि निष्फल खर्च हुई।


