सरसौल ब्लाक के नेवादा बौसर ग्राम पंचायत में हुए मनरेगा घोटाले में ग्राम प्रधान को निलंबित कर वित्तीय व प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिए गए।
तीन सदस्यीय टीम की जांच में भ्रष्टाचार की परतें खुलीं तो सभी हैरान रह गए। वर्ष 2020 से 2023 तक मनरेगा में मजदूरी भुगतान के नाम पर किए गए फर्जीवाड़े में नियम व कानून ताक पर रख दिए गए थे।
गांव के लाल सिंह के जाब कार्ड में फर्जी तरीके से इस्लाम, बराती, अवधेश व धनीराम पारिवारिक सदस्य के रूप में दर्ज मिले जबकि लालसिंह के एक ही बेटा भूरा है। इसी प्रकार शेर अली के जाब कार्ड में महेश को बेटा दिखा दिया गया।
शहजाद अली के नाम से दो जाब कार्ड बनाकर दोनों के मस्टर रोल जारी कर दिए गए। अभिलाष पुत्र भरत के नाम जाब कार्ड जारी किया गया जबकि जांच में इस नाम का कोई भी व्यक्ति गांव का निवासी ही नहीं मिला।
अंधेरगर्दी ऐसी कि इसी जाब कार्ड में चार लोगों को पारिवारिक सदस्य दिखाकर लगभग 300 कार्य दिवस की मजदूरी का भुगतान करा लिया गया। जांच में एक नहीं ऐसे कई मामले मिले जिससे भ्रष्टाचारी बेनकाब हो गए।
प्रधान के दोनों बेटों ने भी मनरेगा मजदूरी का उठाया भुगतान
शिकायतकर्ता भारतीय किसान यूनियन के नेता रवि प्रताप सिंह ने बताया कि भ्रष्टाचार के आरोपित प्रधान समरजीत सिंह यादव के दोनो बेटों धर्मवीर व कर्मवीर ने भी मनरेगा मजदूरी का भुगतान उठाया है जबकि दोनों उच्च शिक्षित हैं। आरोप है कि प्रधान के भाइयों व भतीजों को भी लाभ पहुंचाया गया। सही जांच हो जाए तो बड़ा गबन सामने आएगा।


