बॉम्बे हाई कोर्ट ने पुणे में एक एकड़ जमीन के मालिकाना हक को लेकर पिछले 76 वर्षों से चल रहे विवाद को समाप्त कर दिया है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने मूल जमीन को मालिक के वारिसों के बीच बांटने का आदेश जारी किया है।
दरअसल, जस्टिस फरहान दुबाश की सिंगल बेंच ने पिछले महीने दिए गए अपने फैसले में, जमीन मालिक जानमोहम्मद के वारिसों द्वारा फरवरी 1950 में दायर उन याचिकाओं पर फैसला सुनाया, जिनमें प्रॉपर्टी के बंटवारे और उसमें अपने हिस्से की मांग की गई थी।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने येरवडा में बची हुई लगभग एक एकड़ (4,271 वर्ग मीटर) जमीन को उनके वारिसों के बीच बांटने का आदेश दिया।
क्या है पूरा मामला
बताते चलें कि जानमोहम्मद द्वारा छोड़ी गई प्रॉपर्टी में दो बड़े प्लॉट शामिल थे- एक डेक्कन कॉलेज रोड पर और दूसरा पुणे के येरवडा में। मार्च 1950 में, एक शुरुआती बंटवारे की घोषणा की गई थी। इसके बाद महाराष्ट्र सरकार ने डेक्कन कॉलेज रोड वाले प्लॉट को अधिग्रहित कर लिया और उसका मुआवजा कानूनी वारिसों के बीच बांट दिया गया।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
लेकिन येरवडा में 16 एकड़ के एक प्लॉट को लेकर विवाद बना रहा, क्योंकि कई अन्य लोगों ने जिनमें जमीन मालिक द्वारा अपने जीवनकाल में नियुक्त एक मैनेजर के वारिस भी शामिल थे, उन्होंने प्रॉपर्टी पर अपने अधिकार का दावा किया, उनका तर्क था कि यह जमीन कर्ज के बदले दी गई थी।
1955 में, वारिसों के बीच एक समझौता हो गया। लेकिन, एक एकड़ जमीन पर विवाद बना रहा, जिसे हाई कोर्ट ने इस साल 27 फरवरी को जानमोहम्मद के कानूनी वारिसों के बीच बांटने का निर्देश दिया।


