नशे के रोगियों को बेेहतर इलाज के लिए मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल में चल रहे एडिक्शन ट्रीटमेंट फैसिलिटी (एटीएफ) सेंटर में पांच बेड और बढ़ाए गए हैं। पहले यहां पर 15 बेड की व्यवस्था की गई थी। इसके साथ ही अस्पताल में नशे के रोगियों के लिए अलग से ओपीडी शुरू की जाएगी। मरीजों की बढ़ती संख्या व उन्हें अच्छा इलाज देने के लिए यह व्यवस्था की गई है। अस्पताल में आने वाले नशे के रोगियों में शराब, स्मैक, इंजेक्शन के माध्यम से नशा करने वाले शामिल हैं। अब तक 1800 रोगियों को इलाज दिया जा चुका है।
जिला पुलिस की ओर से भी नशा मुक्ति अभियान के तहत सही राह कार्यक्रम शुरू किया गया है। इसमें समाजसेवी संस्थाओं के साथ मिलकर नशे के रोगियों का इलाज कराया जा रहा है। उन्हें नशा छोड़ने में चिकित्सीय सलाह के साथ उपचार दिलाया जा रहा है। इस मुहिम में एटीएफ सेंटर काफी कारगर साबित हो रहा है।
यहां पर उनका इलाज व काउंसलिंग की जा रही है। नशे के रोगी इलाज के दौरान नशा छोड़ देते हैं लेकिन बाद में वह फिर से नशे की राह पकड़ लेते हैं। जिले की बात करें तो नशे के रोगियों में स्मैक के आदी अधिक हैं। स्मैक सहित अन्य नशीले पदार्थाें की तस्करी पर अंकुश के लिए एंटी नारकोटिक्स सेल कार्रवाई कर रहा है लेकिन रोगियों की वजह से डिमांड अधिक होने से इस पर पूरी तरह से रोक नहीं लग पा रही है।
जून 2024 में एटीएफ सेंटर शुरू किया गया। इसके साथ ही ओपीडी भी चल रही है। अब तक 1803 रोगियों को इलाज मिला है। सेंटर में आने वाले मरीजों में हर तरह के नशे के रोगी शामिल हैं। काउंसलिंग के जरिए इनका नशा छुड़वाया जाता है। लगभग 40 प्रतिशत रोगी नशे को छोड़ देते हैं। हालांकि बाद में उनकी निगरानी नहीं होती। ऐसे में यह पता नहीं लग पाता कि वह दोबारा फिर नशा करने लगे हैं या नहीं।
नशे के लिए जिले में छछरौली, रादौर का छोटा बांस, आजादनगर, पुराना हमीदा, व्यासपुर, पांसरा एरिया, साढौरा में हाट स्पाट हैं। अधिकतर स्मैक की लत के आदी हैं। पुलिस प्रशासन भी इसको लेकर गंभीर है। इसके साथ ही अब अस्पताल में ऐसे रोगियों के लिए अलग से ओपीडी शुरू की जाएगी। अगले सप्ताह यह ओपीडी शुरू हो जाएगी। जिसमें केवल नशे के रोगियों की जांच की जाएगी। यदि उन्हें दाखिल करने की जरूरत है तो एटीएफ में दाखिल किया जाएगा। जहां उनकी काउंसलिंग व उपचार होगा।


