ईरान पर अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई के बाद उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में चिंता का माहौल है। ईरान के धार्मिक शहर कुम में अध्ययनरत जिले के 15 छात्र और इस्लामिक स्कालर फंसे हैं। हमलों के बाद कुछ से संपर्क हुआ, लेकिन बाद में बातचीत बाधित हो गई, जिससे परिजनों की बेचैनी बढ़ गई है।
वहीं, विश्व शांति और खामेनेई की शहादत पर कर्बला सिविल लाइंस में आयोजित मजलिस में रोजेदार और अकीदतमंद दुखी नजर आए। मौलाना हिलाल अब्बास का दर्द भरा खिताब पढ़ा। कहा कि आयतुल्लाह खामेनेई सिर्फ एक सियासी रहबर नहीं, बल्कि इंसानियत, सब्र और इस्तेकामत की बुलंद आवाज थे।पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब बाराबंकी तक महसूस किया जा रहा है। अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर किए गए हमलों के बीच जिले के करीब एक दर्जन से अधिक छात्र और इस्लामिक विद्वान ईरान के शहर कुम में मौजूद हैं। संपर्क में आई रुकावट ने परिवारों की चिंता बढ़ा दी है।
ईरान में रह रहे लोगों में जफर अब्बास फैजी (मौलाना जफर अब्बास उर्फ फैजी), आबिद हुसैन काजमी, अली मेहंदी रिजवी, सैयद काशिफ रिजवी, उनके बच्चे फातिमा रबाब, मोहम्मद रजा, मोहम्मद काजिम, मौलाना फैज बाकरी तथा कटरा निवासी मौलाना अली मेहंदी शामिल हैं। ये सभी वहां धार्मिक शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं या अध्ययन कार्य से जुड़े हुए हैं।
मौलाना जफर अब्बास फैजी के भाई मौलाना अब्बास मेहंदी ‘सदफ’ ने बताया कि हमले के समय उनकी अपने भाई से बातचीत हुई थी। उन्होंने बताया था कि कुम शहर की सीमा के पास हमला हुआ है, लेकिन शहर के अंदर हालात सामान्य हैं। लोग सड़कों पर आ-जा रहे हैं।


