अमेरिका में भारतीय परिवारों के लिए ग्रीन कार्ड हासिल करना आजकल एक सपने जैसा लगने लगा है। हाल ही में एक 20 वर्षीय भारतीय मूल की लड़की ने उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस से सीधा सवाल किया कि ट्रंप प्रशासन भारतीयों के ग्रीन कार्ड के लंबे इंतजार को कम करने के लिए क्या कर रहा है? यह बातचीत तेजी से वायरल हो गई और हजारों भारतीय परिवारों की पीड़ा को एक बार फिर सामने ला दी।
युवती ने खुद को भारत से आए एच-1बी वीजा धारक माता-पिता की बेटी बताया। उसने कहा कि उसके माता-पिता सालों से अमेरिका में काम कर रहे हैं, लेकिन परमानेंट रेजीडेंसी अभी भी नहीं मिला है। बाइडेन प्रशासन के दौरान भारतीयों को ग्रीन कार्ड मिलने में करीब 150 साल लग सकते हैं, यह आंकड़ा सुनकर सभा में सन्नाटा छा गया।
जे.डी. वेंस ने क्या दिया जवाब
उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने छात्रा की बात को बड़े प्यार से सुना। उन्होंने अपनी भारतीय सास-ससुर की तारीफ करते हुए कहा कि वे खुद भारतीय परिवार से जुड़े हैं। फिर उन्होंने जोर देकर कहा कि हर प्रवासी समूह को सबसे पहले अमेरिका फर्स्ट सोचना चाहिए, न कि अपने मूल देश के बारे में सोचना चाहिए।
किस कैटेगरी को लगता है कितना समय?
EB-2 कैटेगरी: जो लोग मास्टर डिग्री या उससे ऊपर की पढ़ाई कर चुके हैं, उनके लिए सबसे आम रास्ता EB-2 है। अभी फाइनल एक्शन डेट जुलाई 2014 के आसपास है। मतलब अगर आपकी प्राथमिकता तिथि इससे पहले की है, तो अब आपकी बारी आ गई है। लेकिन नये आवेदक को वीजा नंबर मिलने में 11 से 12 साल का इंतजार करना पड़ सकता है। इसमें प्रोसेसिंग टाइम और जोड़ लें तो कुल समय और बढ़ जाता है।
EB-3 कैटेगरी: बैचलर डिग्री के साथ स्किल्ड वर्क करने वालों के लिए EB-3 कैटेगरी है। यहां फाइनल एक्शन डेट नवंबर 2013 के आसपास है। नये आवेदकों को 12 से 15 साल का इंतजार करना पड़ सकता है। ये दोनों कैटेगरी भारतीय एच-1बी धारकों के बीच सबसे ज्यादा इस्तेमाल होती हैं। भारी मांग के कारण बैकलॉग इतना बड़ा है कि औसतन 25-30 साल लग जाते हैं।
कहां से आया 150 साल की प्रतीक्षा वाला आंकड़ा?
यह चौंकाने वाला आंकड़ा कैटो इंस्टीट्यूट की 2023 रिपोर्ट से आया है। रिपोर्ट कहती है कि अमेरिका में ग्रीन कार्ड की राह देख रहे 4 लाख भारतीय कार्यकर्ताओं को औसतन 134 साल का इंतजार करना पड़ सकता है। अमेरिका में हर साल कुल 1.4 लाख एम्प्लॉयमेंट-बेस्ड वीजा निकलते हैं और हर देश को सिर्फ 7% कोटा मिलता है।
कुल बैकलॉग 18 लाख का है, जिसमें से 11 लाख भारतीय हैं। रिपोर्ट के अनुसार, भारत से नये आवेदक जीवन भर इंतजार करेंगे और 4 लाख से ज्यादा लोग ग्रीन कार्ड मिलने से पहले ही दुनिया छोड़ देंगे।
इंतजार इतना लंबा है, फिर भी कुछ भारतीय EB-3 या EB-2 से EB-1 में अपग्रेड कर लेते हैं। कुछ लोग EB-5 इन्वेस्टर कैटेगरी चुनते हैं। कई लोग कतार छोड़कर दूसरे देशों में बस जाते हैं। ये बदलाव बैकलॉग को थोड़ा कम करते हैं, लेकिन जड़ समस्या बनी हुई है।


