बीएचयू में कुलपति के आवास के सामने कल रात एक छात्र की सड़क दुर्घटना में मौत के बाद विभिन्न मांगों को लेकर छात्रों ने रविवार की दोपहर धरना शुरू कर दिया। बीएचयू के कृषि विज्ञान संस्थान के एमएससी छात्र सूरज प्रताप सिंह की रविवार को सड़क दुर्घटना के बाद उपचार के दौरान मृत्यु हो गई। विश्वविद्यालय परिसर में शोक और रोष का माहौल है।
छात्रों का आरोप है कि ट्रॉमा सेंटर में समय पर इलाज न मिलने और प्रशासनिक लापरवाही के कारण उनके साथी की जान गई है। सूरज अनुवांशिकी एवं पादप प्रजनन विभाग में द्वितीय वर्ष का छात्र था। वह बिहार के औरंगाबाद का निवासी था। शनिवार की मध्य रात्रि को वह परिसर में बाइक से हास्टल की ओर जा रहा था, तभी वह डिवाइडर से टकरा गया। बाइक पर दो अन्य छात्र भी थे, जिन्हें हल्की चोटें आईं। सूरज को बीएचयू के ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।
छात्रों ने अस्पताल प्रशासन और ड्यूटी पर मौजूद अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्रों का कहना है कि ड्यूटी ऑफिसर नदारद थीं और फोन कॉल का भी कोई जवाब नहीं दिया गया। आरोप है कि इमरजेंसी के समय कागजी कार्रवाई और आईडी वेरिफिकेशन के नाम पर कीमती समय बर्बाद किया गया, जिससे छात्र को समय पर उपचार नहीं मिल सका।
छात्रों ने कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक को पत्र लिखकर कई मांगें की हैं। उन्होंने कहा है कि जांच के बाद जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा लिखित रूप में लापरवाही स्वीकार की जाए और संबंधित डॉक्टर को तत्काल निलंबित किया जाए। इसके अलावा, पीड़ित परिवार को 2 करोड़ की आर्थिक सहायता या परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की गई है।
छात्रों ने यह भी कहा कि भविष्य में किसी भी आपात स्थिति में बिना कागजी कार्रवाई या आईडी के तुरंत इलाज शुरू किया जाए। इसके साथ ही, कैंपस की सड़कों पर पर्याप्त लाइटिंग और सुरक्षित बैरियर की व्यवस्था की जाए ताकि ऐसे हादसों को रोका जा सके।


