जम्मू-कश्मीर सरकार ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीइटी) से संबंधित मामले में सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका (रिव्यू पिटिशन) दायर कर दी है। यह जानकारी शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू ने दी। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
मंत्री ने इंटरनेट मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि सरकार ने अपने वादे के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दाखिल कर दी है। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार इस मामले को गंभीरता से आगे बढ़ा रही है और शिक्षकों के हितों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
30 मई को सरकार ने घोषणा की थी कि टीइटी मुद्दे पर सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर की जाएगी। इससे पहले भी शिक्षा मंत्री ने कहा था कि जम्मू-कश्मीर के शिक्षकों से जुड़े इस मामले में सरकार ने हमेशा जिम्मेदारी और सक्रियता के साथ कदम उठाए हैं तथा केवल आश्वासन ही नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई भी की है। उन्होंने बताया कि सरकार ने पुनर्विचार याचिका दायर करने को मंजूरी प्रदान की थी और कानून, न्याय एवं संसदीय कार्य विभाग ने 26 मई 2026 को अपने स्थायी अधिवक्ता को आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए थे।
पुनर्विचार याचिका के जरिए राहत की उम्मीद बढ़ गई
इस बीच, फरवरी के अंतिम सप्ताह में स्कूल शिक्षा विभाग ने टीइटी से संबंधित अपने आदेश को अगली सूचना तक स्थगित कर दिया था। विभाग के सचिव द्वारा जारी आदेश में कहा गया था कि जम्मू-कश्मीर बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन और राज्य स्कूल मानक प्राधिकरण को टीइटी आयोजित करने के लिए नोडल एजेंसी नामित करने संबंधी सरकारी आदेश को अगले आदेश तक प्रभावहीन रखा जाता है।
इससे पहले विभाग ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में जम्मू-कश्मीर बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन और राज्य स्कूल मानक प्राधिकरण को केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में टीइटी आयोजित कराने के लिए नोडल एजेंसी नियुक्त किया था। सरकार के मौजूदा कदम को टीइटी मामले में प्रभावित शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि अब इस मुद्दे पर सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका के जरिए राहत की उम्मीद बढ़ गई है।


