अयोध्या रामकथा संग्रहालय: ‘प्रभु चरण’ गैलरी बताएगी कहां और क्यों पड़े भगवान राम के चरण

 अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय में भगवान राम, रामायण व रामकथा पर आधारित पुरावशेषों, सामग्री और विभिन्न प्रदर्शों व चित्रण को देखना दर्शकों के लिए किसी रोमांच से कम नहीं होगा।

श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से कराए जा रहे संग्रहालय के जीर्णोद्धार संबंधी कार्य अब अंतिम चरण में हैं। सिविल कार्य पूरा होने के बाद अब दीर्घाओं का विकास शुरू हो गया है। नामकरण हो जाने के बाद इनके थीम पर विमर्श किया जा रहा है।

संग्रहालय की 20 गैलरियों में से एक आठवीं दीर्घा का नाम ‘प्रभु चरण’ रखा गया है। इस दीर्घा के माध्यम से रामभक्तों को यह समझाया जाएगा कि त्रेता युग में भगवान श्रीराम का अवतरण क्यों हुआ, उनके चरण जहां-जहां पड़े, उसका निहितार्थ क्या था।

संग्रहालय के निदेशक डॉ. संजीव कुमार सिंह बताते हैं कि कुल 20 दीर्घाओं में से पांच पूर्णरूपेण डिजिटलाइज्ड होंगी। चार भगवान राम व एक हनुमान जी काे समर्पित रहेगी। इनमें सेवन-डी तकनीक के माध्यम से उनके जीवन प्रसंगों का चित्रण किया जाएगा।

‘प्रभु चरण’ नामक गैलरी के नौ अहम पड़ाव रखे गए हैं, जिसमें हर पड़ाव भगवान श्रीराम के अवतरण से संबंधित होगा। पहला पड़ाव माता कौशल्या की अनुनय से शुरू होगा, जिसमें वह स्तुति करती नजर आएंगी।

दूसरे में श्रीराम की बालक्रीड़ा और तीसरे में गुरुकुल में उनकी शिक्षा-दीक्षा प्रदर्शित की जाएगी। चौथा पड़ाव राम के देशाटन से संबंधित होगा।

पांचवें में भगवान राम का गुरु वशिष्ठ से संवाद (योग वाशिष्ठ) और छठवें में उनका गुरु विश्वामित्र के आश्रम में जाना और असुरों का संहार करना प्रदर्शित किया जाएगा।

सातवां पड़ाव उनके विवाहोपरांत अयोध्या आगमन और वनवास पर जाना, रावण वध आदि, आठवें में लंका विजय के पश्चात नंदीग्राम में आना और नौवां पड़ाव अयोध्या आगमन व गुप्तहरिघाट पर अदृश्यता से संबंधित रहेगा।

इक्ष्वाकु वंश की वंशावली पर आधारित होगी एक गैलरी

निदेशक डॉ. सिंह ने बताया कि एक गैलरी ऐसी होगी, जिसमें भगवान श्रीराम के इक्ष्वाकु वंश की पूरी वंशावली प्रदर्शित की जाएगी। इसमें इक्ष्वाकु वंश के 63 पराक्रमी राजाओं के बारे में जानकारी दी जाएगी। इसमें राजा इक्ष्वाकु, राजा मांधाता, राजा हरिश्चंद्र, राजा सगर, राजा भागीरथ, राजा रघु, राजा दशरथ, राजा श्रीराम, राजा कुश आदि प्रमुख होंगे।

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