दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआइ) को एक स्थिति रिपोर्ट दाखिल कर यह बताने को कहा है कि एजेंसी 1975 के बम ब्लास्ट में पूर्व रेल मंत्री ललित नारायण मिश्रा की हत्या की दोबारा जांच करने की याचिका के पक्ष में है या विरोध में है।
अदालत ने उक्त निर्देश तब दिए जब सीबीआई ने अदालत को बताया कि उन्हें मौखिक निर्देश मिले हैं कि एजेंसी 2014 के ट्रायल कोर्ट के फैसले का समर्थन करेगी, जिसमें अपील करने वालों सहित पांच लोगों (जिनमें से तीन की मौत हो चुकी है) को दोषी ठहराया गया था।
अदालत ने सीबीआ को अपना रुख रिकार्ड में रखने के लिए 25 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई से कम से दो दिन पहले स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा। अदालत ने आदेश दिया कि यह रिपोर्ट कम से कम संयुक्त निदेशक रैंक के अधिकारी द्वारा दाखिल की जाए।
असली दोषियों को क्लीन चिट
अदालत ने उक्त आदेश हत्या के मामले में दोषी करार देने के निर्णय के खिलाफ दोषियों संतोषानंद अवधूत उर्फ घनश्याम प्रसाद सहित अन्य की अपील याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। वहीं, ललित नारायण मिश्रा के परिवार ने भी यह तर्क देते हुए दोबारा जांच की मांग की है कि असली दोषियों को क्लीन चिट दे दी गई है।
यह मामला 1975 में बिहार के समस्तीपुर रेलवे स्टेशन पर हुए बम ब्लास्ट से जुड़ा है। इसमें रेल मंत्री एलएन मिश्रा सहित चार लोगों की मौत हो गई थी और अठारह लोग घायल हुए थे।


