पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच पिछले दो साल में आठ बार झड़प हो चुकी है। लेकिन इस बार दोनों देशों के बीच तनाव काफी ज्यादा बढ़ गया है।
पाक के रक्षा मंत्री ने ख्वाजा आसिफ ने अफगानिस्तान के खिलाफ खुली जंग का एलान कर दिया है। लेकिन अफगानिस्तान को कमजोर समझना पाकिस्तान की सबसे बड़ी भूल साबित हो सकती है।
चक्रव्यूह में फंस चुके हैं अमेरिका-रूस
अफगानिस्तान हमेशा बाहरी ताकतों के लिए एक चक्रव्यूह की तरह सामने आया है। इतिहास गवाह है कि दुनिया के दो ताकतवर देश अमेरिका और रूस, अफगानिस्तान के चक्रव्यूह में फंस चुके हैं।
- साल 1979 में सोवियत रूस, अफगानिस्तान में घुसा था और 10 साल बाद जब रूस की सेना अफगानिस्तान से लौटी, तब तक इन 10 सालों में 14 हजार सोवियत सैनिक मारे गए।
- अमेरिका ने साल 2001 में 9/11 आतंकी हमले के बाद अफगानिस्तान में तालिबान के खिलाफ युद्ध का ऐलान किया था। तालिबान के साथ चली करीब 20 साल की जंग में 2,456 अमेरिकी सैनिक मारे गए। अमेरिका ने इस जंग में करीब 1.87 लाख करोड़ रुपए खर्च किए और आखिरकार 2021 में अमेरिकी सेना को भी लौटना पड़ा।
पाकिस्तान को फंसा रहा तालिबान
अमेरिका-रूस के बाद अब पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के खिलाफ मोर्चा खोला है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि अफगानिस्तान में जीत कभी साफ नहीं होती, लेकिन कीमत भारी चुकानी पड़ती है।
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच इस समय तनाव चरम पर है। पाकिस्तान की खुली जंग की धमकी के बाद दोनों देशों के बीच जंग जैसे हालात हो गए हैं।
तालिबान के पास अमेरिकी हथियार
2021 में जब अमेरिकी सेना ने अफगानिस्तान से वापसी की तो वे करीब 60 हजार करोड़ रुपये के सैन्य साजो-सामान अफगानिस्तान में छोड़ गए थे।
अमेरिका के छोड़े गए इन हथियारों में तीन लाख M-4 और M-16 राइफल, मशीनगन, मोर्टार, नाइट विजन गॉगल्स, बायोमेट्रिक डिवाइस, संचार प्रणाली, ड्रोन और 70 हजार सैन्य वाहन शामिल थे।
अमेरिकी सेना ने ब्लैक हॉक और ME-17 हेलीकॉप्टर, A-29 लाइट अटैक विमान सहित करीब 150 विमान/हेलीकॉप्टर भी अफगानिस्तान में छोड़े।
तालिबान के पास अब करीब 80 हजार से ज्यादा सक्रिय लड़ाके हैं। इसके अलावा अफगानिस्तार के पास सोवियत दौर के कई सैन्य टैंक भी हैं।


