केजरीवाल को क्लीन चिट के बाद JMM का ED पर हमला, हेमंत सोरेन मामले में ‘ब्रह्मास्त्र’ पर सवाल
झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) पर तीखा हमला बोलते हुए हेमंत सोरेन के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पेश किए गए सबूतों को राजनीतिक साजिश करार दिया है।
पार्टी के आधिकारिक X हैंडल से किया गया ट्वीट दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को दिल्ली आबकारी नीति मामले में क्लीन चिट मिलने के ठीक बाद आया है, जिससे विपक्षी दलों में केंद्रीय जांच एजेंसियों के दुरुपयोग पर नई बहस छिड़ गई है।
JMM ने लिखा है कि ED ने हेमंत सोरेन के खिलाफ तथाकथित सबूत के रूप में एक टीवी और एक फ्रिज के बिल पेश किए हैं, जिनकी कुल कीमत महज ₹29,000 है।
इसे “ब्रह्मास्त्र” बताते हुए पार्टी ने आरोप लगाया कि इन मामूली दस्तावेजों के आधार पर महीनों तक मीडिया ट्रायल चलाया गया, राजनीतिक नैरेटिव गढ़ा गया और एक निर्वाचित मुख्यमंत्री को जेल भेजने की कोशिश की गई।
पार्टी की ओर से इसे “न्याय नहीं, राजनीतिक प्रोपेगैंडा” बताया गया है, जिसका मकसद भ्रष्टाचार से लड़ाई नहीं बल्कि जनादेश वाली सरकार को अस्थिर करना है।
जेएमएम ने संलग्न छवियों में दो इनवॉयस दिखाए
- पहला: मित्तल एजेंसी, रांची से 19 फरवरी 2017 का आउटपुट टीवी (मॉडल: REF 19K273ZR/ZNL) का बिल, कुल ₹15,200 (VAT सहित)। खरीदार/संबंधित नाम: रोहित मुंडा/खुशबू मुंडा पब्लिक स्कूल, बारीयातू, रांची।
- दूसरा: एमएस परफेक्ट विजन से 4 नवंबर 2022 (या 22 नवंबर) का शाओमी स्मार्ट टीवी (मॉडल: L32M6-RA) का बिल, कुल ₹14,000 (GST सहित)। कुल टैक्सेबल वैल्यू ₹11,864.41, टैक्स ₹2,135.60।
दोनों बिलों पर PMLA 2002 की धारा 50 के तहत जानकारी प्रदान करने का उल्लेख है। जेएमएम ने एजेंसियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि इसी टीवी और फ्रिज के जरिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ झूठे नैरेटिव गढ़े गए।
पार्टी की ओर से यह बयान ऐसे समय आया जब 27 फरवरी को राउज एवेन्यू कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और 21 अन्य को दिल्ली आबकारी नीति मामले में बरी/डिस्चार्ज कर दिया।
कोर्ट ने CBI की जांच को “स्पेकुलेटिव” बताते हुए कहा कि कोई ओवरआर्किंग साजिश या आपराधिक इरादा साबित नहीं हुआ। केजरीवाल ने इसे “ईमानदारी की जीत” करार दिया। CBI ने फैसले के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की है।
सुप्रीम कोर्ट से 25 फरवरी को ही हेमंत को मिली है राहत
हेमंत सोरेन का मामला कथित भूमि हड़पने से जुड़ा है, जहां ED का आरोप है कि उन्होंने 8.86 एकड़ जमीन अवैध रूप से हासिल की। एजेंसी ने इन बिलों को सबूत के रूप में पेश किया था, दावा करते हुए कि ये जमीन पर रहने वाले संतोष मुंडा के परिवार के नाम पर खरीदे गए थे, जो कथित तौर पर सोरेन की प्रॉपर्टी के केयरटेकर थे।
सोरेन जनवरी 2024 में गिरफ्तार हुए थे, जून 2024 में जमानत मिली। हाल ही में 25 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने ED की समन न मानने पर कार्यवाही पर रोक लगाई और एजेंसी को नोटिस जारी किया।
JMM और AAP जैसे विपक्षी दल इन घटनाओं को जोड़कर केंद्र पर ED/CBI को राजनीतिक हथियार बनाने का आरोप लगा रहे हैं। BJP ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जांच स्वतंत्र है और अदालतें फैसला करेंगी।


