बीजेपी की मैराथन मीटिंग से नदारद रहे सुवेंदु अधिकारी, डैमेज कंट्रोल में लगी भाजपा

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 बंगाल विधानसभा चुनाव की दहलीज पर खड़ी भाजपा के भीतर टिकट बंटवारे और वर्चस्व को लेकर खींचतान तेज हो गई है। गुरुवार को कोलकाता स्थित नेशनल लाइब्रेरी के गेस्ट हाउस में आयोजित भाजपा की एक अति-महत्वपूर्ण बैठक ने उस वक्त हलचल मचा दी, जब राज्य के कद्दावर नेता और नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी पूरे 12 घंटे चली इस चर्चा से गायब रहे।

सुबह 11 बजे से रात 11 बजे तक चली इस मैराथन बैठक में सुनील बंसल, भूपेंद्र यादव और बिप्लब देब जैसे केंद्रीय पर्यवेक्षकों के साथ प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य और सुकांत मजुमदार मौजूद थे। सूत्रों के मुताबिक, बैठक का मुख्य एजेंडा विधानसभा सीटों के लिए संभावित उम्मीदवारों की सूची तैयार करना था।

सुवेंदु अधिकारी बैठक में नहीं हुए शामिल

ऐसे में सुवेंदु की अनुपस्थिति ने राजनीतिक गलियारों में कयासों का बाजार गर्म कर दिया है, क्योंकि वे न केवल पार्टी का प्रमुख चेहरा हैं बल्कि चुनावी रणनीति के मुख्य शिल्पकार भी माने जाते हैं।

चर्चा है कि सुवेंदु ने केवल अपने गढ़ पूर्वी मेदिनीपुर ही नहीं, बल्कि राज्य की अन्य सीटों के लिए भी उम्मीदवारों की एक सूची सौंपी थी, जिस पर केंद्रीय नेतृत्व से पूर्ण सहमति नहीं मिल सकी। जानकारों का मानना है कि इसी ‘असंतोष’ को दर्ज कराने के लिए उन्होंने बैठक से दूरी बनाई। हालांकि, भाजपा नेतृत्व इस मामले पर ‘डैमेज कंट्रोल’ में जुटा है।

क्या बोले सुकांत मजुमदार?

पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजुमदार ने पूर्व में भी कहा था कि सुवेंदु संगठनात्मक बैठकों की लंबी प्रक्रिया में सहज महसूस नहीं करते और जनसंपर्क को प्राथमिकता देते हैं। हालांकि, देर रात दक्षिण कोलकाता के एक होटल में केंद्रीय नेताओं के साथ सुवेंदु की मुलाकात की खबरें भी आई हैं, जिससे साफ है कि पार्टी चुनाव से पहले अपने सबसे ‘व्यस्त’ सिपाही को नाराज करने का जोखिम नहीं उठा सकती। अब देखना यह है कि उम्मीदवारों की अंतिम सूची में सुवेंदु की पसंद को कितनी तवज्जो मिलती है।

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