रमजान में क्या ज्यादा पढ़ना चाहिए? मौलाना ने कहा- इस माह में ये चार काम ज्यादा करो

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 नमाज के दौरान बुरे ख्याल यानी वसवसे आते हैं तो नमाजियों को अपने जेहन पर इसे ठहरने नहीं देना चाहिए। यदि ऐसे ख्याल ठहरे तो नमाज फासिद मानी जाएगी। इस्लामिक सेंटर आफ इंडिया के तहत दारूल निजामिया फरंगी महल में रोजेदारों की दीनी और शरअई रहनुमाई के लिए ऐसे प्रश्नों के उत्तर दिए जा रहे हैं।

शुक्रवार को भी मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली की अध्यक्षता में उलमा के पैनल ने जवाब दिए। आप फोन नंबर 9415023970, 9335929670, 9415102947, 7007705774, 9140427677 पर प्रश्न पूछ सकते हैं। कुछ प्रश्न और उत्तर-

सहरी में बहुत से लोग रात में मस्जिद से जोर-जोर से पुकारते हैं। नातें पढ़ते हैं। यह जायज है?
– इस्लाम में किसी को तकलीफ पहुंचाना जायज नहीं है। इसलिए रात में मस्जिद के माइक से ज्यादा शोर मचाना मुनासिब नहीं है। केवल दो-तीन बार वक्त का ऐलान कर दें। यह मुनासिब होगा।

नमाज में तरह-तरह के ख्यालात और वसवसे (मन में उठने वाले बुरे विचार) आते हैं। क्या किया जाए?

– वसवसों और ख्यालात को अपने जेहन में जमने न दिया जाए। अगर नमाज में उन पर जेहन ठहर गया तो नमाज फासिद हो जाएगी।

सहरी किस वक्त खाना अफजल है?
– सहरी देर से करना अफजल है।

औरतें भी तरावीह पढ़ सकती हैं?
– जी हां, औरतों के लिए भी तरावीह मसनून है।

रमजान में क्या ज्यादा पढ़ना चाहिए?
-नबी पाक का इरशाद है कि इस माह में चार काम ज्यादा करो, एक कलमा तय्यब का विर्द, दूसरा इस्तिगफार, तीसरा ज्यादा से ज्यादा जन्नत की तलब, चौथा जहन्नम से पनाह।

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