मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री को पत्र लिखकर हज यात्रियों के सामान की देरी पर चिंता जताई है। उन्होंने श्रीनगर हवाई अड्डे पर रखरखाव के कारण सामान को यात्रियों के साथ भेजने की व्यवस्था करने का आग्रह किया है।
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने हज यात्रा से लौट रहे यात्रियों के सामान पर लगाई गई कथित रोक को हटाने और उसे सुरक्षित कश्मीर में पहुंचाने के लिए लिए केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राम मोहन नायडू को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
इस बीच, केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय (एमओएमए) ने श्रीनगर लौटने वाले हज यात्रियों के सामान पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि यह कदम श्रीनगर हवाई अड्डे पर रनवे रखरखाव कार्य और परिचालन संबंधी चुनौतियों के कारण उठाया गया है। मंत्रालय के अनुसार, रनवे के रखरखाव और जारी नोटम (के चलते उड़ानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विमानों की पेलोड क्षमता सीमित करनी पड़ी।
उल्लेखनीय है कि हज से लौटने वाले श्रद्धालुओं को अहमदाबाद तक 35 किलोग्राम तक का चेक-इन बैगेज ले जाने की इजाज़त होगी। लेकिन, अहमदाबाद-श्रीनगर सेक्टर में, हर हज यात्री को सिर्फ़ पांच किलो चेक-इन बैगेज ऑनबोर्ड ले जाने की अनुमति है जबकि 30 किलो बैगेज अलग से सड़क के रास्ते श्रीनगर ले जाया जाएगा।
केबिन बैगेज अलाउंस में कोई बदलाव नहीं किया है। इससे हाजियों नाराजगी है और वह चाहते हैं कि वह अपना पूरा सामान एक साथ अपने साथ ही उड़ान में श्रीनगर तक लेकर आएं। इस मुद्दे को लेकर कश्मीर में कई लोगों ने भी एतराज जताया है।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने आज इसी संदर्भ में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री को पत्र लिखकर अवगत कराया कि कई हज यात्री, जिनमें बड़ी संख्या बुजुर्गों की है, वर्षों की तैयारी और इच्छा के बाद हज यात्रा पूरी कर लौटे हैं, लेकिन उनके चेक-इन सामान की व्यवस्था को लेकर वे चिंतित हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि श्रीनगर हवाई अड्डे पर चल रहे रखरखाव कार्य और परिचालन संबंधी प्रतिबंधों के कारण यात्रियों का सामान उसी विमान से जम्मू-कश्मीर नहीं भेजा जा सका, जिससे वे स्वयं लौट रहे हैं। उन्होंने कहा कि सामान को अलग मार्ग से अहमदाबाद भेजा जा रहा है और वहां से सड़क मार्ग के जरिए जम्मू-कश्मीर पहुंचाया जाएगा, जिसके कारण देरी होने की आशंका है।
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि इस स्थिति से हज यात्रियों और उनके परिवारों को काफी निराशा और असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि हज से लौटने के बाद यात्री परंपरागत रूप से ज़मज़म का पानी, खजूर और अन्य धार्मिक उपहार अपने रिश्तेदारों एवं पड़ोसियों में वितरित करते हैं, लेकिन सामान में देरी से यह प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सामान की देरी हज से जुड़ी धार्मिक और सामाजिक परंपराओं के पालन में बाधा उत्पन्न कर सकती है। उन्होंने केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री से आग्रह किया कि यात्रियों के सामान को भी उन्हीं विमानों में जम्मू-कश्मीर भेजने की व्यवस्था की जाए, जिनसे यात्री लौट रहे हैं।


