लोन की लालच में ये 10 फर्जी एप न करें इंस्टाल, वरना पड़ सकते हैं लेने के देने; साइबर यूनिट का अलर्ट

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 डिजिटल इंडिया के दौर में लोन लेना जितना आसान हुआ है। उतना ही खतरनाक भी साबित हो रहा है। इसको लेकर साइबर यूनिट ने बड़ा खुलासा करते हुए 10 फर्जी लोन एप की पहचान की है, जिन्हें विदेशी शत्रुतापूर्ण संस्थाओं द्वारा होस्ट किया जा रहा है।

इन एप को देश की सुरक्षा व नागरिकों की निजता के लिए बड़ा खतरा बताया है। जांच में यह बात सामने आई है कि इन एप के पीछे सक्रिय डेवलपर्स ने खुद को वैध भारतीय कंपनियां दिखाने की कोशिश की है, ताकि लोगों को जाल में फंसाया जा सके।

फर्जी लोन एप में दिया क्रेडिट एप, रुपेनेक्स एप, फंड एक्सेस एप, बेचराजी डिजिटल बही एप, ओकलोन – पर्सनल लोन एप, केयरपे – सिंपल लोन्स एंड फास्ट कैश एप, क्रेडिब्लून एप, रुपी लेक-लाइन क्रेडिट एप, ईज फंड एप व मनीडाक एप के नाम भी शामिल है।

साइबर यूनिट ने चेतावनी दी है कि ये एप लोन देने के बहाने फोन का पूरा एक्सेस लेकर डेटा चोरी करते है और बाद में ब्लैकमेलिंग जैसी वारदातों को अंजाम देते है। ताज्जुब की बात यह है कि प्लेस्टोर पर इन एप की रेटिंग 4.4 से 4.6 स्टार तक दिखाई गई है। हजारों लोगों ने इसके पक्ष में रिव्यू भी लिखे है, जो पूरी तरह से फर्जी हो सकते हैं।

इसका पोस्टर इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित कर लोगाें को इन 10 फर्जी लोन ऐप से सावधान रहेने की अपील की गई है। किसी भी एप को इंस्टाल करने से पहले उसके विवरण की जांच करें।

हमेशा केवल भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा विनियमित व पंजीकृत संस्थाओं से ही लोन लें। यदि किसी धोखाधड़ी का शिकार होते है तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर काल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराए।

डिजिटल हफ्ता वसूली का नया हथियार बने फर्जी लोन एप

देश में तेजी से पैर पसार रहे फर्जी लोन एप केवल वित्तीय धोखाधड़ी का जरिया नहीं, बल्कि लोगों के विरुद्ध डिजिटल हफ्ता वसूली का खतरनाक माड्यूल बन चुका है। गृह मंत्रालय व इंडियन साइबर अपराध समन्वय केंद्र के हालिया विश्लेषण में यह खुलासा हुआ है कि इन एप के पीछे विदेशी शत्रुतापूर्ण संस्थाओं का हाथ है, जो भारतीय नागरिकों को मानसिक व सामाजिक रूप से प्रताड़ित कर रही हैं।

ठगी का यह खेल इंटरनेट मीडिया पर दिखने वाले उन लुभावने विज्ञापनों से शुरू होता है, जो बिना किसी दस्तावेजी कार्रवाई के चंद मिनटों में कर्ज देने का वादा करते हैं। संकट में फंसा व्यक्ति जैसे ही इन एप को इंस्टाल करता है। वह अनजाने में ही निजता की चाबी साइबर ठगों को सौंप देता है।

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