भारतीय नौसेना की सामरिक शक्ति और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के मानचित्र पर कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) एक चमकदार ध्रुवतारे की तरह उभरा है। हुगली नदी के तट से शुरू हुई इसकी यात्रा आज दुनिया के महासागरों में भारत की तकनीकी क्षमता और आत्मविश्वास का परचम लहरा रही है।
पिछले एक दशक में जीआरएसई ने खुद को केवल जहाज जोड़ने वाली इकाई से आगे बढ़ाकर एक पूर्ण डिजाइन और अनुसंधान केंद्र के रूप में स्थापित किया है। यह परिवर्तन रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर भारत की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
उपलब्धियां
- नौसेना के लिए अत्याधुनिक युद्धपोत और फ्रिगेट्स का निर्माण।
- अनुसंधान और डिजाइन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि।
- रक्षा उत्पादन में स्वदेशीकरण को बढ़ावा।
- वैश्विक स्तर पर भारतीय तकनीक और कौशल का प्रदर्शन।
महत्व
जीआरएसई का विकास न केवल भारतीय नौसेना की सामरिक शक्ति को मजबूत कर रहा है, बल्कि यह भारत को रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।


