मुरादाबाद के खेतों में तेंदुए का आतंक, डर के मारे घरों में जागकर कट रहीं ग्रामीणों की रातें

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महलकपुर निजामपुर, अगवानपुर और आसपास के गांवों में इन दिनों तेंदुए की दहशत से आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है।

हाल ही में किसान जोगराज पर हुए तेंदुए के हमले के बाद भी वन विभाग द्वारा ठोस कदम न उठाए जाने से ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। तीन से चार दिन बीत जाने के बावजूद जंगल की सीमा पर अब तक पिंजरा नहीं लगाया गया, जिससे लोगों का भरोसा डगमगा गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि खेतों, झाड़ियों, ईंट भट्ठों और गन्ने की फसलों के आसपास तेंदुए की आवाजाही लगातार देखी जा रही है। कई बार रात के समय उसकी आहट सुनाई देती है तो कभी खेतों में बैठे या चलते हुए नजर आता है।

कुछ ग्रामीणों ने तेंदुए को शावकों के साथ घूमते भी देखा है, जिससे खतरा और बढ़ गया है। महलकपुर निजामपुर, सलेमपुर बंगर, महमूदपुर, काजीपुरा जवाहर नगर गांवों में लोग रात में घर से बाहर निकलने से डर रहे हैं। महिलाएं और बच्चे विशेष रूप से भयभीत हैं।

हालात ऐसे हो गए हैं कि किसान अब अकेले खेतों में जाने से बच रहे हैं। कई गांवों में रात के समय रतजगा किया जा रहा है और लोग बारी-बारी से पहरा दे रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि बार-बार सूचना देने के बावजूद उत्तर प्रदेश वन विभाग ने अब तक केवल आश्वासन ही दिए हैं।

न तो पर्याप्त कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं और न ही नियमित गश्त की व्यवस्था की गई है। इससे लोगों में यह भावना गहराती जा रही है कि उनकी सुरक्षा को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।

वहीं, पास के इलाकों में तेंदुओं के ठिकाना बना लेने से दहशत का माहौल है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जंगलों के सिकुड़ते दायरे और मानव बस्तियों के फैलाव के कारण तेंदुए अब गांवों के करीब पहुंच रहे हैं।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही पिंजरा लगाकर तेंदुए को नहीं पकड़ा गया तो वे जिला मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन करेंगे। लोगों की मांग है कि गांव-जंगल की सीमा पर स्थायी निगरानी व्यवस्था बनाई जाए और नियमित गश्त शुरू की जाए।

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