गंडक नदी के कटाव बर्बाद हुए लोगों की पुनर्वास की आस तमाम प्रशासनिक दावों के बावजूद पूरी नहीं हो सकी है। हालांकि, इस बीच इन्हें कई बार बसने के लिए ठौर उपलब्ध कराने का आश्वासन मिला तो जरूर, लेकिन नतीजा सिफर रहा।
ऐसे में गंडक नदी की बाढ़ तथा कटाव से विस्थापित करीब तीन हजार परिवारों के सदस्य तटबंध के किनारे की झोपड़ियां डाल कर जीवन बसर कर रहे हैं।
तटबंध के किनारे शरण लेने को विवश
जिला मुख्यालय से छह किलोमीटर की दूरी तय करने पर उत्तर दिशा में स्थित है जादोपुर बाजार। यहां पहुंचते ही कटाव पीड़ितों की दशा स्पष्ट रूप से दिखने लगती है। सारण मुख्य तटबंध के किनारे शरण लेने को विवश इन परिवारों को कई बार सरकारी स्तर पर आवास उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया।
इनके पुनर्वास के लिए इंतजाम करने की घोषणा भी की गई, लेकिन लंबी अवधि बीतने बाद भी विस्थापितों को बसने के लिए ठिकाना नहीं मिल सका।
इस बीच विस्थापित अपनी समस्या को लेकर कई बार सड़क पर भी उतरे, लेकिन सड़क पर उतरने का नतीजा भी कुछ नहीं निकला। हद तो यह कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की घोषणा भी इन कटाव पीड़ितों के काम नहीं आ सकी है।


