शहर में पेयजल सप्लाई और सीवरेज व्यवस्था को लेकर लंबे समय से चली आ रही शिकायतों के बीच जनस्वास्थ्य विभाग ने बड़ा फैसला लेते हुए संबंधित ठेकेदार का कांट्रेक्ट रद्द कर दिया है। अब पेयजल वितरण, सीवर लाइन की सफाई, लीकेज मरम्मत और बिलिंग व्यवस्था की जिम्मेदारी विभाग स्वयं संभालेगा।
पिछले एक वर्ष से शहर में पानी के बिल नियमित रूप से वितरित नहीं किए गए। इसके चलते उपभोक्ताओं को एकमुश्त बकाया राशि के साथ दो बार का जुर्माना भी भरना पड़ा, जिससे लोगों में रोष बना हुआ था।
कई वार्डों में सीवर जाम, ओवरफ्लो और दूषित पानी की शिकायतें लगातार मिल रही थीं, लेकिन समाधान समय पर नहीं हो पा रहा था। जनस्वास्थ्य विभाग ने ठेकेदार को विभिन्न मामलों में कई बार नोटिस जारी किए और कार्य में सुधार के निर्देश दिए।
लापरवाही पर लगाया 22 लाख का जुर्माना
लापरवाही बरतने पर करीब 22 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया, लेकिन स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। शहरवासियों की बढ़ती शिकायतों और जनप्रतिनिधियों की आपत्तियों के बाद विभाग ने आखिरकार टेंडर प्रक्रिया ही रद्द कर दी।
अधिकारियों का कहना है कि अब विभागीय टीम सीधे तौर पर फील्ड में उतरकर कार्यों की मानिटरिंग करेगी। पेयजल आपूर्ति का समयबद्ध संचालन, लीकेज की त्वरित मरम्मत और सीवर सफाई के लिए अलग-अलग टीमें गठित की जा रही हैं।
साथ ही बिलिंग व्यवस्था को भी दुरुस्त कर बकाया मामलों का समाधान चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। विभाग के इस निर्णय से शहरवासियों को राहत की उम्मीद जगी है।


