हरक सिंह फिर आए सुर्खियों में, बोले– राहुल गांधी की सिफारिश लाने से नहीं मिलेगा टिकट, जीतने का दम जरूरी

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डा. हरक सिंह रावत एक बार फिर अपने बेबाक बयानों को लेकर सुर्खियों में हैं। हाल ही में विधानसभा अध्यक्ष ऋतु भूषण खंडूड़ी को लेकर दिए गए बयान के बाद अब उन्होंने टिकट वितरण को लेकर सख्त रुख अपनाने की बात कही है।

पार्टी के एक कार्यक्रम में उन्होंने साफ कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में केवल वही नेता टिकट पाएंगे जिनकी अपने क्षेत्र में जीत की मजबूत संभावना होगी। उनका यह बयान इंटरनेट मीडिया में प्रसारित हो रहा है।

उन्होंने कहा कि चाहे कोई नेता कितना भी बड़ा क्यों न हो या राहुल गांधी व राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से सिफारिश लेकर आए, यदि वह जीतने की स्थिति में नहीं है तो उसे टिकट नहीं मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि व्यक्तिगत नजदीकी या गुटबाजी को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी। खुद उनकी, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, वरिष्ठ नेता प्रीतम सिंह या नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य से करीबी भी, किसी के लिए टिकट की गारंटी नहीं होगी।

डा. रावत ने यह भी कहा कि हाल में दिल्ली में प्रदेश कांग्रेस नेताओं की शीर्ष नेतृत्व के साथ हुई बैठकों में भी उन्होंने जिताऊ उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने का सुझाव रखा है। उनके अनुसार पार्टी इस बार चुनावी रणनीति में बदलाव कर संगठन और जीत की संभावनाओं को आधार बनाएगी।

हालांकि, प्रदेश कांग्रेस में आंतरिक खींचतान अभी भी सामने आ रही है। करीब दो महीने बीतने के बावजूद राज्य कार्यकारिणी का गठन नहीं हो पाया है। 70 विधानसभा सीटों पर संभावित उम्मीदवारों को लेकर भी वरिष्ठ नेता खुलकर सामने आने से बच रहे हैं। ऐसे माहौल में हरक सिंह रावत का बयान कई नेताओं की चिंता बढ़ा रहा है और संगठन के भीतर नई बहस को जन्म दे रहा है।

ऋतु को भुली बोलने पर भी भाजपाइयों को दिक्कत

विधानसभा अध्यक्ष ऋतु भूषण खंडूड़ी को राजनीति ज्ञान का मुफ्त ट्यूशन देने के बयान के बाद मचे बवाल पर डा हरक सिंह रावत ने फिर से इंटरनेट मीडिया में प्रतिक्रिया दी। कहा, उन्होंने ऋण खंडूड़ी को भुली (छोटी बहिन) कहकर संबोधित किया, वह राजनीति अनुभव और उम्र में उनसे बड़े हैं।
उनके पिता पूर्व सीएम भुवनचंद्र खंडूड़ी जब वर्ष 1991 में सांसद बने, वह उस समय विधायक बन गए थे। उन्होंने अपने राजनैतिक जीवन में लगातार लोगों के बीच बैठकर कुछ न कुछ सीखा है। लेकिन भाजपाइयों को इससे भी परेशानी हो रही है।

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