NEET छात्रा हत्याकांड को लेकर सियासत गरमाने के बीच अब एक नया विवाद सामने आया है। राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने आरोप लगाया है कि इस मामले पर बयान देने के बाद उन्हें पुलिस अधिकारियों के फोन आ रहे हैं। उनका कहना है कि अधिकारियों की ओर से उन्हें अप्रत्यक्ष रूप से चुप रहने की सलाह दी जा रही है, जिससे यह मामला और गंभीर हो गया है।
बयान के बाद आए पुलिस अधिकारियों के फोन
भाई वीरेंद्र ने दावा किया कि जैसे ही उन्होंने NEET छात्रा हत्याकांड पर सार्वजनिक बयान दिया, उसके कुछ ही समय बाद पुलिस अधिकारियों के कॉल आने लगे। उन्होंने कहा कि फोन पर अधिकारी यह सवाल करते हैं कि वह इस संवेदनशील मामले पर बयान क्यों दे रहे हैं और उन्हें ऐसे बयान देने से बचने को कहा जाता है।
‘ऐसे बयान मत दीजिए’-विधायक का आरोप
विधायक के अनुसार पुलिस अधिकारियों ने उनसे कहा, “सर, आप इस मामले पर बयान क्यों दे रहे हैं, ऐसे बयान मत दीजिए।” भाई वीरेंद्र ने इसे जनप्रतिनिधियों की आवाज दबाने की कोशिश बताया। उनका कहना है कि एक जनप्रतिनिधि होने के नाते जनता के सवाल उठाना उनका संवैधानिक अधिकार है।
सरकार पर सवाल, प्रशासन की भूमिका पर संदेह
भाई वीरेंद्र ने आरोप लगाया कि NEET छात्रा हत्याकांड की जांच को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन निष्पक्ष होता तो बयान देने पर रोक लगाने जैसी बातें नहीं की जातीं। इससे यह आशंका गहराती है कि मामले में कुछ छिपाने की कोशिश हो रही है।
डराने-धमकाने की राजनीति का आरोप
राजद विधायक ने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब विपक्ष के नेताओं को इस तरह के दबाव का सामना करना पड़ रहा हो। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की आलोचना करने वालों को डराने और चुप कराने की राजनीति चल रही है, ताकि सच्चाई सामने न आ सके।
जनता की आवाज दबाने की कोशिश?
भाई वीरेंद्र ने कहा कि NEET छात्रा की मौत केवल एक घटना नहीं, बल्कि छात्र सुरक्षा और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। ऐसे मामलों में सवाल उठाना जरूरी है, लेकिन सरकार और प्रशासन सवाल करने वालों पर ही दबाव बना रहा है।
लड़ाई जारी रखने का ऐलान
विधायक ने साफ कहा कि किसी भी दबाव के आगे वह झुकने वाले नहीं हैं। उन्होंने ऐलान किया कि जब तक NEET छात्रा को न्याय नहीं मिलता और सच्चाई सामने नहीं आती, तब तक वह इस मुद्दे को उठाते रहेंगे। इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल और तेज हो गई है।


