साइबर अपराधियों के झांसे में छात्र, सेवानिवृत्त कर्मी, किसान, व्यापारियों के फंसने का सिलसिला थम नहीं रहा है। दो माह में हुईं सात घटनाएं इसकी पुष्टि करती हैं। प्रशासनिक स्तर पर जनहित में चले रहे जागरूकता के बावजूद साइबर अपराधी आगे हैं।
वे वर्कफ्राम होम व्यापार, रुपये दोगुणा करने, सरकारी नौकरी का झांसा, स्वजन को फर्जी मुकदमे में फंसने या घायल होने की बात बताकर, बैंककर्मी बन उनके खाते की केवाईसी के बहाने, एटीएम के नवीनीकरण के लिए गोपनीय कोड हासिल कर, परिचित बताकर उनके खाते में रुपये मंगाने, व्हाट्सएप पर क्यूआर कोड भेज, गूगल-पे, फोन-पे की गोपनीय डिटेल्स हासिल कर लोगों के बैंक खाते पलक झपकते खाली कर रहे हैं।
खाते से रुपये निकलने के बाद लोगों को जागरूकता कार्यक्रम से प्राप्त टिप्स याद आते हैं, लेकिन तब तक बहुत देर हो जाती है। तब दौड़-भाग और शिकायतों के अलावा उनके पास कोई विकल्प नहीं बचता है।
केस एक
पांच दिन पहले महरुआ के सुखईपुर गांव के प्रशांत शुक्ल को वर्क फ्राम होम जाब का लालच देकर उनके खाते से साढ़े तीन लाख रुपये उड़ा दिया गया।
केस दो
एक सप्ताह पहले अहिरौली के रुकमंगदपुर के सेवानिवृत्त बैंककर्मी श्रीनाथ वर्मा से साइबर अपराधियों ने 3.64 लाख रुपये उड़ा दिया।
केस तीन
अहिरौली के मिझौड़ा बाजार में अयोध्या के मुहल्ला जयसिंहपुर निकट यज्ञवेदी मंदिर के पवन चतुर्वेदी का मोबाइल हैक कर गत माह उसके खाते से 65 हजार रुपये उड़ा दिया।
केस चार
गत दिसंबर माह में भीटी के चंदौका गांव के छात्र अक्षय कुमार यादव को नौकरी का झांसा देकर बैंक खाते से सात लाख रुपये निकाल लिया गया।
केस पांच
गत दिसंबर में अहिरौली के गांव प्रतापपुर चमुर्खा के मजरे कटघरवा की युवती सेजल से क्यूआर कोड के जरिए डेढ़ लाख रुपये उड़ा दिया।


