सेक्टर-36 के जिस मकान में ईसाई धर्म में मतांतरण कराने को लेकर गतिविधियां संचालित हैं। वह मकान बीना एस्टर इब्राहिम पत्नी आनंद बारगेस इब्राहिम दंपती के नाम है। करीब 10 वर्ष पहले बने दो मंजिला मकान के बेसमेंट में बड़ा सा हाॅल बना है। सोसायटी वासियों ने मकान मालिक दंपती के ही गिरोह का मास्टर माइंड होने की आशंका जताई है। प्रार्थना सभा में शामिल होने वाले कुछ लोगों ने बताया आरोपित मरीजों को ईशू की प्रार्थना से ठीक होने व राहत मिलने की बात कहकर ईसाई धर्म में मतांतरण के लिए उकसाते थे।
त्योहार पर प्रार्थना सभा में पादरी भी हैं आते
मकान के आसपास रहने वाले लोगों ने बताया हर रविवार इस मकान में प्रार्थना-सभाएं आयोजित हो रहीं थी। शुरुआत में प्रार्थना सभा में शामिल होने वालों की संख्या कम थी, जो लगातार बढ़ती रही। हर बार प्रार्थना-सभा में नये-नये चेहरे दिखते थे। महिलाओं और पुरुषों के अलावा बच्चे भी आते थे। क्रिसमस आदि त्योहार पर प्रार्थना सभा में पादरी भी आते थे।
400 लोगों का मतांतरण कराने की आशंका
मतांतरण के लिए रुपए पैसे का लालच भी दिया जाता था। करीब तीन साल पहले सुरेश से चंद्रकिरण का संपर्क हुआ था। इसके बाद से चंद्रकिरण भी नियमित रूप से प्रार्थना-सभा में शामिल होने लगा। सोसायटी वासियों का कहना है कि टैक्सी चालक और चंद्रकिरण ने सेक्टर-36 ही नहीं, ऐच्छर, कासना, सिग्मा तक फैला रखा है।
आरोपितों द्वारा करीब 400 लोगों को मतांतरण के लिए उकसाने की आशंका है। यह भी आशंका है कि गिरोह के मास्टर माइंड मकान मालिक दंपती हैं। उनके द्वारा ही प्रार्थना-सभा समेत तमाम आयोजनों में होने वाले खर्च की फंडिंग की जाती थी। पुलिस ने इन बिंदुओं पर भी जांच शुरू की है।
वाट्सएप ग्रुप से ईसाई धर्म का प्रचार-प्रसार
पुलिस ने आरोपित टैक्सी चालक सुरेश का मोबाइल फोन कब्जे में लिया है। उसमें फास्टर नाम से ग्रुप मिला है। इसमें बड़ी संख्या में लोग जुड़े हैं। ग्रुप पर ईसाई धर्म के प्रचार-प्रसार से संबंधित सामग्री प्रसारित की जाती थी। सुरेश की पत्नी, साली और चंद्रकिरण द्वारा भी अपने मोबाइल फोन पर ऐसे ही ग्रुप बनाकर लोगों को मतांतरण के लिए प्रेरित करने वाली सामग्री भेजे जाने की आशंका है। पुलिस आरोपितों के बैंक खातों को भी खंगाल रही है।
पिता के ठीक होने से ईसाई धर्म से प्रभावित हुआ सुरेश
करीब नौ साल पहले टैक्सी चालक सुरेश के पिता शंकर बीमार हुए थे। काफी इलाज कराने के बाद भी उनकी हाॅलत में सुधार नहीं होने पर सुरेश का ईसाई धर्म से संबंधित व्यक्ति से संपर्क हुआ था। दावा है कि प्रार्थना से पिता के ठीक होने से वह ईसाई धर्म के प्रभाव में आ गया था। करीब पांच वर्ष से वह सेक्टर सिग्मा में रह कर टैक्सी चला रहा है। यहां पर भी वह गरीबों और बीमारों को निशाना बनाकर मतांतरण के लिए उकसाता था।


