घर में बिटिया की शादी की रस्में उत्साह के साथ पूरी की जा रही थी। घरैता से लेकर पहुना भी पहुंचे हुए थे। मंगल गीत भी गाए जा रहे थे। कन्या की तिलक से लेकर मेहंदी, हल्दी व अन्य रस्में भी पूरी की जा चुकी थी। हाथें में मेहंदी भी रचा गया था। चार फरवरी को अन्य रस्मों के बाद रात में बारात आने वाली थी। लेकिन इन सब पर पानी फिर गया और शादी के उत्साह का माहौल पल भर में परेशानी में बदल गया।
जिस बालिका की शादी होनी थी, वह नाबालिग निकली और सामाजिक संगठन जस्ट राइट फार चिल्ड्रेन ने इस मामले में एक्शन लेकर पूरे मामले को न्यायालय के संज्ञान में लाया। इसके बाद शादी रोक दी गई।
लड़की मुफस्सिल थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली है और उसकी शादी हीरोडीह थाना क्षेत्र के कठवारा निवासी दीपक मंडल के साथ चार फरवरी को होनी थी। इधर न्यायालय के संज्ञान लेने के बाद शादी को रोक दिया गया और बालिका को मुफस्सिल थाने की पुलिस के कब्जे में फिलहाल रखा गया है।
वहीं बुधवार को इस मामले में उपायुक्त रामनिवास यादव व पुलिस अधीक्षक डा. बिमल कुमार थाना पहुंचे और बालिका समेत उसके स्वजनों से लंबी पूछताछ करते हुए फिलहाल तीन साल तक बालिका की शादी नहीं करने का निर्देश दिया है। साथ ही कहा है बाल विवाह कानूनी रूप से अपराध है। ऐसे में निर्धारित उम्र के बाद उसकी शादी की जाए। फिलहाल बालिका को थाने में ही स्वजन के साथ रखा गया है।
30 से शुरू था शादी की रस्में
बालिका की शादी को लेकर 30 जनवरी से शादी की रस्में शुरू कर दी गई थी। इसके तहत 30 को तिलकोत्सव, दो फरवरी को हल्दी व मेहंदी, तीन फरवरी को सोखा पूजा व पनैती तथा चार फरवरी को मंडपाच्छादन, कुलदेवी-देवता पूजन, घृतढारी, बारात आगमन व रात्रि में शुभ विवाह होना था।


