बचपन में होने वाली गंभीर बीमारियों में कैंसर आज भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है, लेकिन समय पर पहचान और आधुनिक उपचार पद्धतियों के चलते अब इस बीमारी से जंग जीतना काफी हद तक संभव हो गया है।
आंकड़ों के मुताबिक बिहार में हर साल करीब दो से तीन हजार बच्चे कैंसर से प्रभावित हो रहे हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि यदि बच्चों को समय पर और सही इलाज उपलब्ध कराया जाए, तो लगभग 80 प्रतिशत बच्चे पूरी तरह स्वस्थ जीवन की ओर लौट रहे हैं।
रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट एसोसिएशन (एआरओआई) के अनुसार, देशभर में हर वर्ष करीब 70 हजार बच्चों में कैंसर का पता चलता है। बिहार में बच्चों में होने वाले कैंसर के मामलों में सबसे अधिक संख्या ब्लड कैंसर यानी ल्यूकेमिया की है, जो कुल मामलों का लगभग 40 प्रतिशत है। इसके अलावा किडनी, लिवर, हड्डियों, एड्रिनल ग्रंथि, लिंफोमा और रीढ़ की हड्डी से जुड़े कैंसर के मामले भी सामने आ रहे हैं।
पटना स्थित आईजीआईएमएस, पीएमसीएच, एनएमसीएच, एम्स पटना, महावीर कैंसर संस्थान और बुद्धा कैंसर सेंटर सहित विभिन्न सरकारी और निजी अस्पतालों में बीते एक वर्ष के दौरान 658 बच्चों ने कैंसर को मात दी है। ये बच्चे न केवल अन्य मरीजों बल्कि उनके परिजनों के लिए भी उम्मीद और प्रेरणा का स्रोत बने हैं। इलाज के लिए राज्य के सभी जिलों से बड़ी संख्या में बच्चे पटना पहुंच रहे हैं।


