भारत-अमेरिका आर्थिक साझेदारी से यूपी को वैश्विक बढ़त, $1 ट्रिलियन इकोनॉमी लक्ष्य को नई मजबूती

2.7kViews
1915 Shares

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘विकसित उत्तर प्रदेश’ और $1 ट्रिलियन इकोनॉमी के लक्ष्य को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी मजबूती मिली है। भारत और अमेरिका के बीच हाल में हुई आर्थिक साझेदारी तथा अमेरिकी टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर औसतन 18 प्रतिशत तक लाए जाने के फैसले से उत्तर प्रदेश के उत्पादों के लिए दुनिया के सबसे बड़े बाजार के दरवाजे खुल गए हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस प्रगति को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में समानता और स्वाभिमान पर आधारित नई विदेश नीति की अहम उपलब्धि बताया है। उनका कहना है कि यह समझौता प्रदेश के उद्योग, निर्यात और रोजगार को नई दिशा देगा।

1. ओडीओपी और एमएसएमई: वैश्विक बाजार में यूपी की मजबूत दावेदारी

अब तक मुरादाबाद के पीतल उत्पाद, भदोही के कालीन और आगरा के चमड़ा उद्योग को ऊंचे अमेरिकी टैरिफ के कारण चीन और वियतनाम के सस्ते उत्पादों से कड़ी प्रतिस्पर्धा झेलनी पड़ती थी।

  • लागत में राहत: टैरिफ में बड़ी कटौती से यूपी के पारंपरिक उत्पादों की अमेरिका में लैंडिंग कॉस्ट कम होगी, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी।

  • सीधा निर्यात: बिचौलियों की भूमिका घटने से ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ODOP) से जुड़े कारीगरों और उद्यमियों को उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य मिल सकेगा।

2. डिफेंस कॉरिडोर: असेंबली से उन्नत तकनीक तक

भारत-अमेरिका के बीच बढ़ता रणनीतिक और औद्योगिक भरोसा उत्तर प्रदेश के डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (लखनऊ, कानपुर, झांसी, आगरा और अलीगढ़) के लिए नए अवसर लेकर आया है।

  • एडवांस्ड टेक्नोलॉजी: अमेरिकी कंपनियों के सहयोग से अब प्रदेश में केवल असेंबली तक सीमित न रहकर ड्रोन सिस्टम, रडार और एयरोस्पेस कंपोनेंट्स के निर्माण के साथ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

  • कौशल और रोजगार: इससे इंजीनियरिंग, डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स और उच्च तकनीकी क्षेत्रों में प्रदेश के युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

3. टेक और डेटा सेंटर: नोएडा-लखनऊ बनेंगे जीसीसी हब

अमेरिकी टेक कंपनियों के लिए उत्तर प्रदेश की जीसीसी नीति-2024 अब और अधिक आकर्षक बन गई है।

  • आईटी हार्डवेयर में तेजी: टैरिफ कटौती से सर्वर और नेटवर्किंग उपकरणों के आयात की लागत घटेगी, जिससे नोएडा और लखनऊ में डेटा सेंटर परियोजनाओं को गति मिलेगी।

  • एआई और फिनटेक निवेश: क्लाउड कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और फिनटेक के क्षेत्र में वैश्विक कंपनियां अपने ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) उत्तर प्रदेश में स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

4. फार्मा और ग्रीन एनर्जी: ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’ की नई पहचान

ललितपुर में प्रस्तावित बल्क ड्रग पार्क अब वैश्विक सप्लाई चेन का अहम केंद्र बनने की ओर अग्रसर है।

  • फार्मा निर्यात को बढ़ावा: टैरिफ में राहत से दवा और फार्मा उत्पादों के अमेरिकी बाजार में प्रवेश को बढ़ावा मिलेगा।

  • ग्रीन एनर्जी अवसर: स्वच्छ ऊर्जा और सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’ रणनीति के तहत नई पहचान बनाने को तैयार है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *