राज्य में बाल विवाह की कुप्रथा अब भी पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकी है। बीते दो वर्षों के दौरान राज्य सरकार के संज्ञान में बाल विवाह के 111 मामले आए, जिनमें समय रहते हस्तक्षेप कर इन्हें रोका गया। यह जानकारी सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने दी।
उन्होंने बताया कि जनवरी 2024 से अब तक पंजाब में सामने आए बाल विवाह के सभी 111 मामलों में प्रशासन और विभागीय टीमों की तत्परता से विवाह संपन्न होने से पहले ही रोक लगा दी गई।
मंत्री ने जिला-वार आंकड़े साझा करते हुए बताया कि अमृतसर में 5, बरनाला में 1, बठिंडा में 9, फतेहगढ़ साहिब में 4, फिरोजपुर में 4, फाजिल्का में सबसे अधिक 18, फरीदकोट में 3, गुरदासपुर में 8, होशियारपुर में 1, जालंधर में 2, लुधियाना में 3, कपूरथला में 5, मानसा में 8, मोगा में 12, श्री मुक्तसर साहिब में 5, पटियाला में 4, पठानकोट में 2, रोपड़ में 1, संगरूर में 1, मोहाली में 4, शहीद भगत सिंह नगर में 5 और तरनतारन में 6 बाल विवाह के मामलों को रोका गया।
डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि बाल विवाह के खिलाफ सरकार सख्त रुख अपनाए हुए है और समाज से इस कुप्रथा को जड़ से खत्म करने के लिए जागरूकता और निगरानी दोनों पर लगातार काम किया जा रहा है।


