केंद्र और राज्य सरकारों के प्रयासों का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। कई वर्षों से घाटे में चल रही देश की बिजली वितरण कंपनियां आखिरकार लाभ में पहुँच गई हैं। रविवार को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान सभी बिजली वितरण कंपनियों ने कुल 2,701 करोड़ रुपये का लाभ दर्ज किया है।
लंबे समय से घाटे में थीं कंपनियां
बिजली मंत्रालय ने बताया कि राज्य विद्युत बोर्डों के विभाजन और कॉरपोरेटाइजेशन के बाद से बिजली वितरण कंपनियां लगातार घाटे में चल रही थीं। वित्त वर्ष 2013-14 में इन कंपनियों का कुल घाटा 67,962 करोड़ रुपये था। इसके बाद लगातार सुधार प्रयासों के चलते यह घाटा वित्त वर्ष 2023-24 में घटकर 25,553 करोड़ रुपये रह गया।
सुधार की दिशा
सरकार ने बिजली वितरण व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कई कदम उठाए। इनमें तकनीकी सुधार, वित्तीय अनुशासन, स्मार्ट मीटरिंग और बिजली चोरी पर नियंत्रण जैसे उपाय शामिल रहे। इन प्रयासों का परिणाम अब सामने आया है, जिससे कंपनियों की वित्तीय स्थिति मजबूत हुई है।
भविष्य की संभावनाएँ
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही रफ्तार बनी रही तो आने वाले वर्षों में बिजली वितरण कंपनियां और अधिक लाभ कमा सकती हैं। इससे न केवल उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएँ मिलेंगी बल्कि ऊर्जा क्षेत्र में निवेश और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
निष्कर्ष
देश की बिजली वितरण कंपनियों का घाटे से बाहर निकलकर लाभ में आना ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है। यह उपलब्धि सरकार की नीतियों और सुधारात्मक कदमों की सफलता को दर्शाती है।


