कभी प्रतिदिन 16 हजार लीटर दूध का उपार्जन करने वाला बलिया दुग्ध संघ आज अपने अस्तित्व को बचाने की जद्दोजहद में लगा है। अधिकारियों की उदासीनता और लंबे समय से भुगतान न होने के कारण पराग डेयरी की बलिया इकाई एक जून 2025 से पूरी तरह बंद हो चुकी है।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2022 तक पराग डेयरी द्वारा जनपद के प्रत्येक दुग्ध संग्रह रूट पर करीब 25 वाहन दूध कलेक्शन के लिए भेजे जाते थे, जिससे पशुपालकों को सीधे लाभ मिल रहा था। नियमित संग्रह और समय पर भुगतान के कारण दुग्ध उत्पादकों में उत्साह बना हुआ था।
हालांकि, डेयरी के बंद होने के बाद स्थिति पूरी तरह बदल गई है। पराग डेयरी से संचालित 308 दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियां भी बंद हो चुकी हैं, जिससे हजारों पशुपालकों की आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है।
वर्तमान हालात में सीमावर्ती क्षेत्रों के लगभग 15 हजार पशुपालक प्रतिदिन करीब 60 हजार लीटर दूध बिहार की सुधा डेयरी को देने के लिए मजबूर हैं। सुधा डेयरी ने इस अवसर का लाभ उठाते हुए बलिया के साथ-साथ मऊ और गाजीपुर तक अपने दुग्ध उद्योग का विस्तार कर लिया है।
स्थानीय पशुपालकों का कहना है कि यदि समय रहते पराग डेयरी की बलिया इकाई को पुनर्जीवित नहीं किया गया, तो जिले का दुग्ध उत्पादन पूरी तरह दूसरे राज्यों पर निर्भर हो जाएगा।

