भारतीय रक्षा बल हवाई खतरों, विशेषकर दुश्मन ड्रोन हमलों, से निपटने के लिए अपनी सुरक्षा व्यवस्थाओं को मजबूत कर रहे हैं। ऑपरेशन सिंदूर के अनुभवों से मिले सबक के आधार पर सेना ने नई रणनीति तैयार की है।
इस दिशा में तीनों सेनाएं—थल सेना, नौसेना और वायुसेना—मिलकर एक संयुक्त काउंटर अनमैन्ड एरियल सिस्टम (सीयूएएस) ग्रिड विकसित कर रही हैं। यह नेटवर्क पिछले 5 से 10 वर्षों में विकसित किए गए विभिन्न काउंटर-ड्रोन सिस्टम को एकीकृत करेगा। इसके माध्यम से संदिग्ध ड्रोन गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी और तत्काल कार्रवाई संभव होगी।
इसके अलावा, सेना आबादी वाले क्षेत्रों में हवाई रक्षा तोपों की तैनाती पर भी काम कर रही है। केंद्र सरकार की पहल ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ के तहत देशभर में व्यापक हवाई सुरक्षा कवच विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
सूत्रों के अनुसार, यह सीयूएएस ग्रिड भारतीय वायुसेना की मौजूदा इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम (IACCS) से अलग और स्वतंत्र होगी, जिससे हवाई सुरक्षा में बहुस्तरीय कवच सुनिश्चित होगा।