एम्स को यलो फीवर का टीका लगाने के लिए केंद्र बनाया गया तो पूर्वांचल के साथ ही आसपास के जिलों के लोगों की उम्मीद परवान चढ़ने लगी। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय लखनऊ के साथ गोरखपुर में यलो फीवर का टीका लगाने की व्यवस्था से लगा कि अफ्रीकी देशों में जाने की राह आसान हो जाएगी लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है।
यलो फीवर का टीका लगाने के लिए आनलाइन अप्वाइंटमेंट में ही बहुत दिक्कत हो रही है। यदि अप्वाइंटमेंट मिल गया तो कम से कम 10 नागरिकों के आने का इंतजार किया जाता है। सब व्यवस्थित होने के बाद टीका लगाने के लिए बिल्कुल सुबह बुला लिया जाता है लेकिन रिपोर्ट देर शाम को दी जाती है। इस कारण बाहर से आने वाले लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।एम्स में मीडिया सेल की चेयरपर्सन डा. आराधना सिंह ने कहा कि यलो फीवर से बचाव का टीका लगवाने आने वालों को कोई दिक्कत नहीं होने दी जाएगी। समस्या की जानकारी मिली है। संबंधित लोगों से बात कर समाधान कराया जा रहा है।
38 लोगों को किया गया वापस
एम्स में यलो फीवर से बचाव का टीका मंगलवार व शुक्रवार को लगाया जाता है। शुक्रवार को 15 लोगों को टीका लगा। टीका लगवाने के लिए 53 लोग आए थे लेकिन 38 लोगों को वापस कर दिया गया। लोगों का कहना है कि पहले पासपोर्ट की कापी ली जाती थी लेकिन इस बार अचानक पासपोर्ट की फोटोकापी के साथ ही हवाई यात्रा के टिकट की फोटोकापी भी मांगी जानी लगी। लोगों ने आपत्ति जताई तो बताया गया कि पहले टीका ज्यादा था, अब कम हो गया है। जिसके पास टिकट रहेगा, उसी को लगाया जाएगा।

