ब्राजील के अमेज़न शहर बेलेम में हो रहे यूएन के वार्षिक जलवायु सम्मेलन COP30 में इस बार एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अमेरिका पहली बार 30 साल में आधिकारिक तौर पर सम्मेलन से अनुपस्थित है और इसी खाली जगह को चीन ने तेजी से भर दिया है। सम्मेलन स्थल के मुख्य प्रवेश द्वार पर चीन का विशाल पैवेलियन, उसकी बड़ी कंपनियों की मौजूदगी और उसके अधिकारियों की सक्रिय कूटनीति ने इसे इस साल का सबसे प्रभावशाली देश बना दिया है।
अमेरिका के हटते ही चीन की भूमिका बढ़ी
चीन के पैवेलियन में CATL, BYD, State Grid, Trina Solar और Longi जैसी दिग्गज ग्रीन-टेक कंपनियां लगातार प्रेजेंटेशन दे रही हैं। उनका फोकस है नवीकरणीय ऊर्जा, बैटरी टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, और ग्रीन सप्लाई चेन। चीन के प्रतिनिधि लगातार दूसरे देशों से मुलाकात कर रहे हैं और क्लाइमेट नेगोशिएशन के माहौल को सकारात्मक रखने की कोशिश कर रहे हैं।
IRENA के डायरेक्टर जनरल फ्रांसेस्को ला कैमरा ने कहा: “कूटनीति हमेशा खाली जगह की ओर बहती है,अमेरिका के हटने से वह जगह चीन ने ले ली है।”
दक्षिणी देशों को भी फायदा—चीन का दावा
चीन के पर्यावरण उप मंत्री ली गाओ ने कहा: “दुनिया की सबसे बड़ी नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षमता होने से विकासशील देशों को भारी फायदा हुआ है।” चीन ने COP30 के लिए BYD के प्लग-इन हाइब्रिड वाहनों की एक पूरी फ्लीट भी उपलब्ध कराई है, जो बायोफ्यूल पर भी चल सकते हैं। ब्राज़ील के अधिकारी भी चीन के योगदान की तारीफ कर रहे हैं: चीन अपनी ऊर्जा क्रांति को दुनिया के लिए लाभकारी बना रहा है, कम दामों पर साफ ऊर्जा उपलब्ध हो रही है।
नेगोशिएशन में भी सक्रिय — अमेरिका की कमी पूरी कर रहा चीन
बैठकों में भी चीन का असर साफ दिख रहा है। पहले जहां चीन केवल अपने मुद्दों पर बोलता था, इस बार वह विभिन्न देशों को सहमति तक लाने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। ब्राज़ील के एक राजनयिक ने बताया कि चीन ने COP30 का एजेंडा फाइनल करवाने में अहम भूमिका निभाई।

